2013 में नगर पंचायत से उच्चीकृत हो चंपावत नगर पालिका बना और इसमें छतार को शामिल किया। तब लगा कि यहां विकास का सूर्योदय होगा लेकिन छह साल बाद भी पालिका का पहला वार्ड विकास में अग्रणी नहीं हो सका है। छिटपुट काम तो हुए लेकिन काफी काम बाकी है। यहां तक कि पथ प्रकाश का भी पुख्ता प्रबंध नहीं हो पाया है।
दो हजार से अधिक आबादी वाले छतार वार्ड में डीएम, एसपी, सीडीओ सहित तमाम जिला स्तरीय अफसरों के आवास तो हैं ही लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान 1965 में पाक से हुए युद्ध में शहीद हुए शिरोमणि चिल्कोटी से है। शहीद की धर्मपत्नी और परिवार यहीं रहते हैं।
नगर निकाय में नई बसावट वाले इस वार्ड की घनी आबादी से विकास में तेजी होनी चाहिए थी लेकिन नियमित रूप से सफाई न होने से लेकर पथ प्रकाश से अछूते इलाकों में अंधेरे को दूर करने का इंतजाम नहीं हो सका है। पार्क का काम भी अभी लटका हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे होने के बावजूद विकास की सुस्त गति लोगों को नहीं भाती है।
छतार में वर्षों पूर्व महिला अस्पताल था जो अब बंद हो चुका है। इस भवन का उपयोग विभाग के दूसरे कार्यों के लिए हो रहा है। लगातार बढ़ रही आबादी के चलते यहां फिर से अस्पताल शुरू होना चाहिए। गिरीश पांडेय।
विकास के कई काम हुए हैं, लेकिन पथ प्रकाश की अभी कमी है। लिहाजा वार्ड के सभी इलाकों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे अपराध पर भी रोकथाम होती है। लोकमणि पंत, एबीएसए।
क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं। शहीद शिरोमणि चिल्ड्रन पार्क में पालिका ने दो शौचालय बनाए हैं। कलक्ट्रेट रोड से डड़ा तक रास्ता निर्माण, सफाई पर खास ध्यान दिया गया है। लोकेश पुनेठा, सभासद।