चंपावत के कफलांग गांव में बच्चों की ओर से एकत्र किए गए पुराने कपड़े।
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चंपावत। कोरोना काल में कफलांग क्षेत्र के बच्चों ने खाली समय के सदुपयोग का अनूठा तरीका निकाला है। लॉकडाउन और अनलॉक में स्कूल बंद होने के कारण इन बच्चों की ओर से पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल चलाई जा रही है। ये बच्चे आसपास के क्षेत्रों से लोगों से पुराने कपड़े एकत्र कर रहे हैं। धोने के बाद इन कपड़ों से टेलरों के जरिये बैग तैयार कर रहे हैं।
तैयार कपड़े के बैगों को दुकानदारों और आम लोगों को वितरित किया जा रहा है। बच्चों की ओर से पॉलिथीन की थैलियों के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही यह मुहिम लोगों को लुभा रही है। बच्चों की ओर से तैयार किए जा रहे पुराने कपड़ों के बैग लोगों को लुभा रहे हैं। अभियान में बच्चों का नेतृत्व कर रहे पंकज देव के अनुसार पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सामान आदि लाने में पॉलीथिन और प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग कम करने के उद्देश्य से बच्चों की ओर से बैग तैयार किए जा रहे हैं।
अब तक एक हजार से अधिक कपड़े के बैग तैयार किए गए हैं। उनकी बिक्री की जा रही है। इस कार्य से जहां एक तरफ कई टेलरों को रोजगार मिल रहा है, दूसरी तरफ लोग बच्चों को उदारता के साथ पुराने कपड़े दे रहे हैं।
‘है जालो ’ ग्रुप के माध्यम से चार बच्चों ने शुरू की मुहिम
चंपावत। कफलांग के राहुल, ललित, हरीश और सचिन ने सोशल मीडिया के व्हाट्सएप ग्रुप ‘है जालो ’ बनाकर पुराने कपड़ों के बैग तैयार करने की मुहिम शुरू की है। बीते दो सप्ताह में बच्चों की ओर से आसपास के गांवों से एकत्र पुराने कपड़ों से एक हजार से अधिक बैग तैयार किए जा चुके हैं। कपड़े के बैग की कीमत 15 से 30 रुपये तक रखी गई है। संवाद