चंपावत। पुलिस की ओर से बाल भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों के पुनर्वास के लिए ऑपरेशन मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में भिक्षा नहीं शिक्षा दें थीम पर पुनर्वास कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस दौरान सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग से आम जनता को जागरूक किया जाएगा।
एसपी लोकेश्वर सिंह के अनुसार भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने और उनके पुनर्वास के लिए तीन चरणों में अभियान संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में एक मार्च से अभियान शुरू हो चुका जो कि 15 मार्च चलेगा। इसमें भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों और उनके परिवारों को चिह्नित किया जा रहा है। जबकि 16 से 31 मार्च तक दूसरे चरण में सभी स्कूल, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों, बस-रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थानों में बच्चों को भिक्षा न देने के संबंध में रैली, नुक्कड़ नाटकों और सोशल मीडिया आदि के माध्यम से जागरूकता अभियान संचालित किए जाएंगे। एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलने वाले तीसरे चरण में भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को भिक्षावृत्ति से हटाकर उनके और उनके माता-पिता की काउंसलिग कर बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। एक बार पुनर्वासित बच्चों के फिर से भिक्षावृत्ति में लिप्त मिलने पर उनके माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
अभियान के लिए गठित टीम में शामिल रहेंगे यह लोग
चंपावत। पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन मुक्ति अभियान के लिए जिला स्तर पर टीम में सीओ अशोक कुमार सिंह, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल प्रभारी मंजू पांडेय, रवि जोशी, गणेश बिष्ट, पूरन सिंह, पूनम लोक्टा, कमला कोहली, हरीश कन्याल और तकनीकी टीम में अभियोजन अधिकारी तनुजा वर्मा, राजेंद्र प्रसाद, उमा आर्या शामिल हैं।
जिला बाल कल्याण समिति की ओर से चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट के साथ ही जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा में बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए कई बार निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में समिति के समक्ष बाल भिक्षावृत्ति संबंधी कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।
- द्वारिका शर्मा, जिला विधि सह परिवीक्षा अधिकारी, चंपावत।