कुछ साल पूर्व बागेश्वर के सुमगढ़ का स्कूल जमींदोज हो गया था, जिसमें 18 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। अभी भी कई विद्यालय ऐसे हैं जिनमें जर्जर भवन में बच्चे पढ़ रहे हैं। वहां कब हादसा हो जाए कहा नहीं जा सकता। इसी का एक उदाहरण है चंपावत विकासखंड का चौड़ाकोट राजकीय प्राइमरी विद्यालय। इस विद्यालय का भवन भी जर्जर हो चुका है। दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है तो छत में दरार पड़ गई है। ऐसे में यहां पढ़ रहे 56 बच्चों की जिंदगी खतरे में हैं।
यहां से करीब 61 किलोमीटर दूर चौड़ाकोट के राजकीय प्राइमरी स्कूल में 56 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां तीन शिक्षक तैनात हैं। विद्यालय भवन की हालत ठीक नहीं है। दीवारों का प्लास्टर उखड़ा हुआ है, छत भी बदहाल है। शिक्षक कृष्णपाल बोहरा और दीपक चंद्र का कहना है कि विद्यालय भवन की दशा एकदम खराब है। आए दिन प्लास्टर उखड़कर गिरता रहता है। तकरीबन तीन दशक पुराने भवन को ध्वस्त कर नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव शिक्षा कार्यालय भेजा गया, लेकिन अभी तक भवन नहीं बन सका है।
एमडीएम के लिए भी पानी मिलना दूभर
प्राइमरी स्कूल में पेयजल कनेक्शन तो है, मगर पानी नहीं। पानी की लाइन टूटी हुई है। पेयजल स्रोत सूखा हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि पानी का इस कदर संकट है कि मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) तक के लिए पानी नहीं है। भोजन के लिए पानी करीब 700 मीटर दूर नौले से लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। खुद बच्चे भी बोतलों में घर से पानी लाते हैं।
नए शौचालयों का नहीं हो रहा उपयोग
चौड़ाकोट प्राथमिक स्कूल में शौचालयों की कमी नहीं है। एनएचपीसी ने कुछ माह पूर्व तीन नए शौचालय बनाए हैं। लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पाता है। इसकी वजह भी पानी की किल्लत है। स्कूली बच्चे और शिक्षकों को इस वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौड़ाकोट के भवन का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके लिए निष्प्रयोज्य प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा जिले के कुल 27 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल भवनों के निर्माण के लिए 3.54 करोड़ रुपये का प्रस्ताव विभाग मुख्यालय को भेजा गया है। लेकिन अभी तक इन्हें मंजूरी नहीं मिली है।
-सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) चंपावत।