चंपावत जिले का आयुर्वेदिक अस्पताल बगैर डॉक्टर के है। इसके चलते लोगों को आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, एलोपैथिक चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के मकसद से सोमवार को खुद डीएम डॉ. अहमद इकबाल ने जिला अस्पताल में मरीजों की नब्ज टटोली, लेकिन आयुर्वेदिक अस्पताल की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
चार अगस्त को आयुर्वेदिक अस्पताल की डॉ. वंदना के निदेशालय संबद्ध कर दिया गया था। इसके बाद डीएम ने विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करने के आदेश दिए। इस पर चल्थी के डॉ. एसके कश्यप को चंपावत संबद्ध किया गया है, मगर वे 22 सितंबर को यहां योगदान देने के बाद से उपार्जित अवकाश (ईएल) पर हैं। इस वजह से अस्पताल बेपटरी हो गया है। यहां की जिम्मेदारी इकलौते फार्मेसिस्ट डीपी बिजल्वाण के कंधों पर है।
चंपावत अस्पताल में कम हो रहे मरीज
वर्ष मरीज
2013 7183
2014 7343
2015 6604
2016 6897
2017 अगस्त तक 2253
तीन अस्पताल डॉक्टर विहीन हो गए
सिर्फ चंपावत नगर ही नहीं, जिले के कई अन्य आयुर्वेदिक अस्पतालों की हालत भी बदतर है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. सुरेश चंद्र उप्रेती ने बताया कि जिले के 23 अस्पतालों में से तीन में एक भी डॉक्टर नहीं है। दिगालीचौड़, सिमलखेत के आयुर्वेदिक अस्पताल डॉक्टर विहीन हैं। इसके चलते दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के उपचार में दिक्कत आ रही है। वहीं चल्थी के डॉक्टर को चंपावत भेजा गया है।
पूर्णकालिक विभागीय मुखिया भी नहीं
चंपावत जिले के आयुर्वेदिक विभाग में पिछले साल से पूर्णकालिक जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी का पद खाली है। इस पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी लोहाघाट के वरिष्ठ डॉ. सुरेश चंद्र उप्रेती को दी गई है। डॉ. उप्रेती करीब दो घंटे लोहाघाट अस्पताल में मरीजों का इलाज करने के बाद 13 किमी दूर चंपावत कार्यालय सेवा दे रहे हैं।