अनुबंध खत्म, देहरादून दूध भेजने पर संशय
नया अनुबंध नहीं होने पर चंपावत दुग्ध संघ को लगेगा 11 लाख का चूना
हर माह 90 हजार लीटर दूध भेजा जाता है दून
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। दुग्ध संघ के दूध को देहरादून भेजे जाने पर तलवार लटक गई है। इसकी वजह दून दूध भेजे जाने का अनुबंध खत्म होना है। नया अनुबंध अभी नहीं हुआ है। इसके चलते दुग्ध संघ को भारी चपत लगने का अंदेशा पैदा हो गया है।
चंपावत जिले मेें दूध का भारी उत्पादन होता है। डेढ़ लाख से अधिक दुधारू पशुओं केे जरिए करीब ढाई लाख लीटर दूध रोजाना उत्पादित होता है। इसमें से करीब 90 प्रतिशत दूध बाजार में खप जाता हैै। जबकि 20 हजार लीटर से अधिक दूध दुग्ध संघ में दिया जाता है। बाजार में खास खपत नहीं होने से इस दूध को देहरादून, लालकुंआ और खटीमा भेजा जाता है। रोजाना तीन हजार लीटर दूध इन तीन शहरों में भेजा जा रहा है। लेकिन देहरादून दुग्ध संघ से हुआ अनुबंध खत्म होने से देहरादून दूध भेजे जाने को लेकर संशय हो गया है। देहरादून को दूध भेजे जाने से चंपावत दुग्ध संघ को हर रोज 90 हजार रुपये का लाभ हो रहा था। जबकि देहरादून के अलावा दोनों अन्य स्थानों में दूध भेजे जाने की भाड़े की रकम चंपावत दुग्ध संघ को देनी पड़ती है।
देहरादून मेें दूध भेजे जाने से चंपावत दुग्ध संघ को खासा लाभ है। देहरादून दुग्ध संघ को बिक्री किए जाने वाले दूध का अनुबंध 31 अगस्त को खत्म हो गया है। इसे लेकर नए अनुबंध के लिए बातचीत की जा रही है।
राजेश मेहता,
प्रबंधक, दुग्ध संघ, चंपावत।