नेपाल सीमा से लगे गुमदेश के चैतोला मेले के दूसरे दिन सोमवार को पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के साथ चमू देवता की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। सुहाने मौसम के बीच सोमवार को निकली चमू देवता की शोभायात्रा में हजारों लोग साक्षी बने। रविवार की रात को जमान को मड़ गांव में लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। यहां रात भर ढुस्कों का गायन किया गया। इसके बाद सोमवार को ये रथ चौखामा बाबा मंदिर तक लाया गया। विभिन्न गांव के जत्थों ने मंदिर पहुंचकर परिक्रमा की और चमू देव को प्रसाद के रूप में पापड़ चढ़ाया।
चमदेवल के चौखाम बाबा यानि चमू देव के मंदिर में सुबह से ही मेला कमेटी अध्यक्ष पंडित शंकर दत्त पांडेय और पंडित हरीश कलौनी की अगुवाई में मंदिर में पूजा-अर्चना का दौरा शुरू हो गया था। मड़ गांव में पूर्वाह्न करीब दो बजे विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भक्तगण चमू देवता के डोले को पहाड़ियों से होकर पहले जमानीगढ़ तक लाए। करीब 2.41 बजे पुलहिंडोला, पोखरी, जिंडी, सिरकोट के संयुक्त जत्थे चमू देवता मंदिर आए।
इसके बाद जाख, गुरेली, बसकुनी, सीलिंग, चौपता के जत्थे 20 मिनट के अंतराल में चमू देवता मंदिर पहुंचे। भक्त गण डोले को देवडांगर के साथ चमुखल तक लाए। यहां पर चमू देवता ने अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। चमूखल से न्योलटुकरा होते हुए जयकारों के साथ जत्थों ने डोले को चमदेवल के चौखाम बाबा मंदिर तक पहुंचाकर परिक्रमा की।
शोभायात्रा के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद धामी ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इस मौके पर मेला कमेटी के खीमराज धौनी, बहादुर सिंह धौनी, मदन कलौनी, मुकेश कुमार, देव सिंह धौनी, हयात सिंह धौनी, नर सिंह धौनी, चंदन सिंह, जोगा सिंह, डूंगर सिंह आदि थे।
पुख्ता रही सुरक्षा व्यवस्था
मेले में व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए एसडीएम आरसी गौतम के अलावा राजस्व विभाग की टीम मौजूद थी। पेयजल की व्यवस्था के लिए जल संस्थान ने पेयजल टैंकर लगाए थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का पुख्ता इंतजाम था।
नेपाल के श्रद्धालु भी उमड़े
नेपाल से भी बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने चमू देवता के मंदिर में मत्था टेका। मेले में अल्मोड़ा, टनकपुर, पिथौरागढ़, बरेली, हल्द्वानी, नैनीताल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।