हल्द्वानी वन प्रभाग के शारदा और चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज में घूम रहे हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए दोनों रेंज के जंगलों में सीसी कैमरे और पिंजरे लगा दिए गए हैं। वहीं तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर से पांच सदस्यीय एक्सपर्टों की टीम भी यहां भेजी गई है। पिछले तीन दिनों से बाघ की गतिविधियों का पता नहीं चल सका है।
चार माह के भीतर क्षेत्र के जंगलों में बाघ के हमले से तीन महिलाओं की मौत की घटना के बाद वन विभाग ने हमलावर बाघ की पहचान कर उसे पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए हैं। गत 24 जून को बस्तिया गांव में हुई घटना से क्षेत्र में बाघ की दहशत बढ़ गई है। बाघ का ऐसा खौफ बना हुआ है कि शाम होते ही लोग घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं।
इधर जन दबाव के चलते वन विभाग भी बाघ को पकड़ने की कोशिश में जुटा हुआ है। शारदा रेंज के बाद बूम रेंज के जंगलों में भी बाघ की गतिविधियों की जानकारी लेने को सीसी कैमरे और पिंजरा लगा दिया गया है। चंपावत के प्रभागीय वनाधिकारी एके गुप्ता ने बताया कि हल्द्वानी वन प्रभाग से मंगाए गए 14 सीसी कैमरों के साथ ही एक पिंजरा भी जंगल में लगाया गया है।
बता दें कि शारदा रेंज के जंगल में अब तक 25 सीसी कैमरे और दो पिंजरे लगाए जा चुके हैं, लेकिन न तो हमलावर बाघ की गतिविधि का पता लग पाया है और न ही बाघ पिंजरों में कैद हुआ है।
शारदा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ख्याली राम आर्य ने बताया कि तराई पश्चिमी रामनगर वन प्रभाग से बाघ पकड़ने वाले पांच एक्सपर्ट कर्मचारियों की टीम यहां पहुंची है। दो दिन से डेरा जमाए इस टीम ने शारदा और बूम दोनों रेंज के जंगलों का सर्वे किया है।