चंपावत। वेतन में देरी की वजह से इस्तीफा देने वाले जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राहुल चौहान का मामला स्वास्थ्य महानिदेशक तक पहुंच गया है। शनिवार को सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने पूरे मामले की जानकारी फोन से डीजी डॉ. अमिता उप्रेती को दी। सीएमओ ने बताया कि बांडधारी सर्जन का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं किया है। साथ ही डॉ. चौहान बांड की शर्तों को तोड़ने पर भरी जानी वाली राशि जमा कराए बगैर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। सीएमओ ने बताया कि पीएमएस द्वारा पत्रावली भेजे जाने के बाद वे आगे की कार्यवाही करेंगे।
इधर जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरके जोशी ने सर्जन को शनिवार को पत्र भेज इस्तीफे पर पुनर्विचार करने के साथ जिला अस्पताल में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। कहा कि डॉ. चौहान ने वेतन नहीं मिलने को इस्तीफा देने की वजह बताई गई थी। अब जून से अगस्त तक का वेतन मिल चुका है। ऐसे में डॉ. चौहान को काम पर लौटना चाहिए। इसके बावजूद अगर वे काम पर नहीं लौटेंगे, तो मामले की विधिवत जानकारी डीजी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को दी जाएगी। 18 जून से जिला अस्पताल में सेवा देने वाले सर्जन डॉ. राहुल चौहान ने वेतन मिलने में देरी की दलील देते हुए 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया था। और इस वक्त उनके लोहाघाट के एक निजी अस्पताल में काम करने की बात सामने आ रही है।
वेतन मिलने के बाद क्यों काम पर नहीं लौट रहे सर्जन
सर्जन डॉ. राहुल चौहान ने वेतन मिलने में देरी की बात कहते हुए 9 सितंबर को इस्तीफा दिया था। अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर वेतन ना मिलने की वजह से इस्तीफा दिया है, तो 10 सितंबर को वेतन मिलने पर काम पर क्यों नहीं लौट रहे हैं। वहीं सर्जन का कहना है कि पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद वेतन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।