बनबसा (चंपावत)। बनबसा में आठ ग्रामसभाएं हैं। इनकी भौगोलिक स्थिति भी एक दूसरे से भिन्न हैं। सभी गांवों की समस्याएं करीब-करीब एक समान बैं। राज्य बनने के बाद भी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के साथ ही सरकार जिम्मेदार है। सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी, श्रेय लेने की राजनीति से विकास नहीं हो रहा है। इसका खमियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से देवीपुरा, गुदमी में सड़कें नहीं बनीं, इससे ग्रामीण नाराज हैं। उनका कहना है कि आश्वासन मिलने के बाद भी काम नहीं होता है। हर बार चुनाव में हर हाल में काम कराने का वादा करने वाले जनप्रतिनिधि जीतने के बाद मुकर जाते हैं। आठ दशक बाद भी ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। देवीपुरा, गुदमी में कई ग्रामीण वर्षों से भूमि का मालिकाना हक दिलाने की मांग करते आ रहे हैं। जंगली जानवरों के साथ ही लावारिस पशुओं से निजात नहीं मिल रही है। ग्रामीण सरकार और जनप्रतिनिधियों से यह सवाल हर बार पूछते हैं। भूमि का मालिकाना हक नहीं होने से कई ग्रामीण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। बैंक लोन नहीं मिल पाने से कुछ मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने तो सभी प्रत्याशी उनके द्वार पर पहुंच जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह आं लोगों के लिए अपने घर का दरवाजा बंद कर देते हैं।
कोट
भूमि का मालिकाना हक नहीं होने से ग्रामीण सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। बैंक ऋण की सुविधा नहीं मिल पाती है। बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए लाेन तक नहीं मिल पाता है। आजादी के बाद से ग्रामीण आदिवासियों का सा जीवन यापन करने को विवश हैं। - अंजली, देवीपुरा मझगांव।
संपर्क मार्ग नहीं होने से बरसात में आवागमन में दिक्कत होती है। अपना कृषि उत्पाद तक बाजार नहीं पहुंचा पाते हैं। सड़क के अभाव में खेती करने के कृषि यंत्र आदि तक खेतों में नहीं पहुंचा पाते हैं। जलभराव से रास्तों पर से स्कूली बच्चों का चलनाा मुश्किल हो जाता है। - श्लाम लाल, देवीपुरा मझगांव।