लोहाघाट (चंपावत)। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गौरा महोत्सव की धूम मची है। महिला, पुरुषों की कई टोलियां गौरा गीतों के गायन में रमे हैं।
लोहाघाट नगर सहित फोर्ती, गुमदेश क्षेत्र के चमदेवल जाख जिंडी, लुपड़ा, नरसों, सुनकुरी, निडिल, बाराकोट, नौमाना, भरछाना आदि स्थानों पर देर रात तक गौरा का गायन किया जा रहा है। जिंडी गांव के महोत्सव में समिति के अध्यक्ष पं. मदन कलौनी के नेतृत्व में महाभारत कालीन गौरा गीतों का गायन हुआ। इसमें पुरुषों ने कौरव ले चलि हालि चाल, लाख को महल बनायो एसो घर पांडव दियो, लाख का महल बेचि गया पांडव ले बना हालि जोगी को वेष, ल्याओ-ल्याओ बेटियो हो धतुरी फूल, फूल न हो तो पाती तोड़ लाओ आदि गीतों का गायन किया गया। महिलाओं ने गौरा देवी की मूर्ति के चारों ओर घूमते हुए मांगलिक गीत, झोड़े, चांचरी गायन किया। इनमें पुष्पा कलौनी, हेमा देवी, रीता देवी, गोविंदी देवी, कमला देवी, भगत राम, कल्यान चंद, गोपाल राम, प्रेम चंद, ललित चंद आदि रहे।