नेपाल में मधेसी आंदोलन के चलते डीजल-पेट्रोल की कमी बरकरार है। प्रशासन की ओर से टैक्सी वाहनों के बनबसा बॉर्डर पर एक चक्कर ही जाने के फरमान का बनबसा टैक्सी यूनियन ने कड़ा रोष जताया है। उन्होंने प्रशासन के फरमान को बेतुका करार देते हुए हाईकोर्ट की शरण में जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इससे यात्रियों को दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पेट्रोल की तस्करी करने वालों पर कार्रवाई करे, न कि अन्य वाहन चालकों को बेवजह परेशान करे।
बीते कई दिनों से नेपाल में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति प्रभावित होने से वहां किल्लत बनी हुई है। इस पर बनबसा बॉर्डर पर प्रशासन की ओर से टैक्सी वाहनों को एक चक्कर ही वाहनों को जाने दिया जा रहा है। टैक्सी यूनियन ने बैठक कर इस आदेश पर रोष जताया। वक्ताओं ने कहा कि जो वाहन तस्करी में लिप्त हैं, उन पर प्रशासन कार्रवाई करे। यात्रियों को ले जा रहे वाहनों को नहीं रोका जाए। कॉमर्शियल वाहनों को एक से अधिक चक्कर जाने से रोकना गलत है।
आरोप लगाया कि यह भारत-नेपाल संधि का भी उल्लंघन है। उन्होंने सर्वसम्मति से इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाने का फैसला लिया। बैठक में यूनियन अध्यक्ष अनिल थ्वाल, जगदीश चंद, रिंकू थ्वाल, सोनू बिष्ट, विवेक बिष्ट, कपिल भार्गव, शनि वर्मा, हरीश भट्ट, अनिल तिवारी, जगदीश जोशी, सुनील गुप्ता, मनोज कश्यप, राजू रावत, दीपक बैज आदि मौजूद थे।