जिला मुख्यालय से 115 किमी दूर डांडा गांव में दो साल पहले जीआईसी खुला। यहां के छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा देने के लिए 59 किलोमीटर दूर टनकपुर जाना पड़ता है। इंटर के बच्चे इस सत्र में पहली बार परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्र दूर होने से अभ्यर्थियों को दिक्कतों के साथ साथ जेब भी ढीली करनी होगी।
राज्य बनने के बाद हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों की संख्या 59 से बढ़कर 104 (47 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और 57 जीआईसी व जीजीआईसी) हो गई है। डांडा गांव में 2015 में जीआईसी अस्तित्व में आया। इंटर बोर्ड के परीक्षार्थियों को इम्तिहान देने के लिए गांव से 59 किलोमीटर दूर टनकपुर जीजीआईसी के परीक्षा केंद्र में जाना होगा। जबकि हाईस्कूल के अभ्यर्थी 61 किमी दूर आमबाग राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में परीक्षा देंगे। दोनों परीक्षाओं में 51 छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे।
डांडा के परीक्षार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि 17 मार्च से शुरू हो रही परीक्षा के दौरान उन्हें टनकपुर में किराए में रहना होगा। करीब एक माह टनकपुर में रहने के लिए छात्र-छात्राओं को गृहस्थी जोड़नी पड़ेगी। चारपाई से लेकर गैस सिलेंडर आदि का इंतजाम करना पड़ेगा। घर से दूर रहने से न केवल अतिरिक्त खर्च होगा बल्कि उनकी पढ़ाई और नंबरों पर भी फर्क पड़ेगा। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह का कहना है कि डांडा को परीक्षा केंद्र बनाने की लंबे समय से मांग की जाती रही है लेकिन विभाग इस मांग की अनसुनी कर रहा है।
इस बार पनियां बना नया परीक्षा केंद्र
जिले में इस बार 40 परीक्षा केंद्रों में बोर्ड के 8767 अभ्यर्थी इम्तिहान देंगे। पनियां जीआईसी को नया परीक्षा केंद्र बनाया गया है। अब तक पनियां के अभ्यर्थी करीब आठ किमी दूर मूलाकोट में इम्तिहान देते थे। इस बार हाईस्कूल में 2399 बालिकाओं सहित कुल 4816 अभ्यर्थी व इंटर में 1939 बालिकाओं सहित कुल 3770 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। इसके अलावा हाईस्कूल में 51 और इंटर में 130 व्यक्तिगत अभ्यर्थी भी इम्तिहान देंगे।
बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद करता है। इसके निर्धारण में अभ्यर्थियों की संख्या के अलावा स्कूल और परीक्षा केंद्रों के बीच की दूरी का मानक है। यहां के विषम भौगोलिक हालत और फासले को देखते हुए विभाग आगे से डांडा जीआईसी को परीक्षा केंद्र बनाने की पहल करेगा।
डीएस राजपूत, सीईओ, चंपावत।