चंपावत। जिले के ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के लोग आज भी यातायात की सार्वजनिक सुविधा से वंचित हैं। इसकी मार ग्रामीण क्षेत्र के कारोबार पर भी पड़ रही है। लोहाघाट में रोडवेज का डिपो होने के बावजूद रोड से लगे ग्रामीण संपर्क मार्गों में भी बसों का संचालन नहीं किया जाता है। सीमांत मडलक, चमदेवल, रौसाल, पुलहिंडोला, लोहाघाट से सिमलखेत, छिनकाछिना-थुवामौनी-सिमलखेत मार्ग पर केवल टैक्सियों का ही संचालन होता है।
राज्य सरकार की ओर से छात्राओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों को रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा तो दी गई है, लेकिन बस सेवाएं न होने से चाहकर भी लोग उसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। जिले के पहाड़ी क्षेत्र की यातायात व्यवस्था का इकलौता जरिया रोडवेज बस, जीप है, मगर ये सेवाएं भी मुख्य मार्गों पर ही है। जिले की 313 ग्राम पंचायतों में से एक-तिहाई ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज की सेवाएं नहीं हैं।
इन इलाकों में यातायात सेवा का अकेला माध्यम टैक्सी ही बचती है, लेकिन इनमें अधिक किराए के साथ ओवरलोड की मार भी झेलनी पड़ती है। साथ ही ये साधन भी सिर्फ सुबह ही मिलते हैं। कारगर परिवहन सेवा न होने से यहां के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोहाघाट, चंपावत समेत अन्य मंडियों में इन क्षेत्रों के उत्पादों को पहुंचने के लिए भी अधिक भाड़ा देना पड़ता है।
उधर, रोडवेज के क्षेत्रीय महाप्रबंधक पवन महरा का कहना है कि जिन मार्गों पर रोडवेज की बस सेवाओं की जरूरत है, वहां का सर्वेक्षण कराने के साथ लोगों की मांग आने पर बसों का संचालन किया जाएगा। फिलहाल लोहाघाट डिपो में चालकों की काफी कमी है।
लोहाघाट (चंपावत)। डिपो में चालकों की कमी के कारण टनकपुर डिपो में संबद्ध किए गए चालकों से डबल ड्यूटी ली जा रही है। डिपो सेे 20 चालकों की डिमांड की गई है। हाल में डिपो की पांच बसें नीलामी के लिए भेजी गई हैं, इससे यहां अब 41 बसों का बेड़ा ही बचा है।
रोडवेज की ओर से दिल्ली-रीठासाहिब, लोहाघाट-रुड़की वाया देवीधुरा, लोहाघाट-पंचेश्वर सड़क मार्गों पर केवल लंबी दूरी की ही बसें संचालित की गई हैं। वयोवृद्ध किसान धर्म सिंह बोहरा, पूर्व छात्रसंघ महासचिव नेहा गड़कोटी का कहना है कि ग्रामीण संपर्क मार्गों पर रोडवेज बसें नहीं चलने से वह सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।