सूखीढांग क्षेत्र की ग्राम पंचायत जौल में भेषज संघ की ओर से बांटे जा रहे तेजपात के पौधों की गुणवत्ता को लेकर भेषज संघ समन्वयक और ग्रामीणों में नोकझोंक हो गई। इस दौरान गालीगलौज भी हुई। ग्रामीणों ने भेषज संघ के समन्वयक राकेश वर्मा पर अभद्र व्यवहार करने एवं एक साल पहले शुल्क वसूलने के बाद भी तेजपत्ता के लिए परमिट न देने का आरोप लगाया है। इधर, भेषज संघ के समन्वयक ने भी ग्रामीणों पर धक्का-मुक्की और गालीगलौज का आरोप लगाया है।
भेषज संघ की ओर से तेजपात की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने को इन दिनों तेजपात के पौधे बांटे जा रहे हैं। शुक्रवार को भेषज संघ समन्वयक जौल ग्राम पंचायत में पौधे बांटने पहुंचे तो वहां पौधों की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इस दौरान तीखी नोकझोंक के साथ ही भेषज संघ समन्वयक और ग्रामीणों में गालीगलौज तक होने लगी। पूर्व ग्राम प्रधान हरीश बोहरा का कहना है कि भेषज समन्वय द्वारा गांव में बुजुर्गों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। ग्रामीणों का कहना था कि कम से कम दो साल के पौधे बांटे जाने चाहिए, लेकिन यहां सड़े-गले और करीब छह माह के पौधे बांटे जा रहे हैं।
उन्होंने समन्वयक पर यह भी आरोप लगाया कि गत वर्ष गांव में शिविर लगाकर भेषज संघ द्वारा तेजपात परमिट के लिए डेढ़ सौ रुपये का शुल्क वसूला था, लेकिन किसानों को अब तक परमिट नहीं दिया गया है। उधर, समन्वयक वर्मा का कहना है कि पौधों के वितरण के दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और गालीगलौज की। साथ ही पौधे बांटने में व्यवधान डाला। उन्होंने बताया कि बांटे जा रहे पौधे विभागीय ठेका आवंटन पर ज्योलीकोट (नर्सरी) से लाए गए हैं। परमिट को लेकर उठाए सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ किसानों के परमिट बनकर आ गए हैं और कुछ के आने बाकी हैं। चल्थी चौकी इंचार्ज प्रकाश विश्वकर्मा ने बताया कि घटना के बारे में पुलिस को सूचना नहीं है। अगर कोई तहरीर देता है तो कार्रवाई की जाएगी।