फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Champawat News: जर्जर स्कूलों के भवन और कक्ष होंगे ध्वस्त

विज्ञापन
चंपावत जिले में जर्जर हाल में पहुंचा जीआईसी चौमेल का भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
चंपावत। जिले में 31 राजकीय इंटर कॉलेजों और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में जर्जर, बेकार पड़े 100 से अधिक कक्षों और भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। इन चिह्नित भवनों में कक्षाएं नहीं चल रही हैं। शिक्षा विभाग की ओर से इन भवनों के स्थान पर नए भवन बनाए जाएंगे।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शिक्षा विभाग की ओर से दैवी आपदा की दृष्टि से संवेदनशील बने जीर्ण-शीर्ण स्कूल भवनों को चिह्नित कर उनके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिले में माध्यमिक विद्यालयों की सूची में सबसे पुराना स्कूल भवन जीआईसी गूंठ गरसाड़ी का है जिसका निर्माण वर्ष 1960 में किया गया था। यहां स्कूल के पुराने भवन के साथ ही पांच अन्य कमरों को भी ध्वस्त किया जाना है।
इसके अलावा 1962 में बनाए गए जीआईसी गरसाड़ी के चार कमरों को भी जमींदोज किया जाएगा जबकि जीआईसी टनकपुर में हॉस्टल एवं शिक्षक आवास के साथ बड़ा हॉल, पुराने कंप्यूटर कक्ष और अतिथि गृह को भी ध्वस्त किया जाना है। संवाद
विज्ञापन

इन स्कूलों के भवन और कक्ष होंगे ध्वस्त
जीआईसी चौमेल, बरदाखान, मऊ, डोबाभागू, जानकीधार, दिगालीचौड़, मडलक, जीजीआईसी चमदेवल, जीआईसी रौसाल, गूंठ गरसाड़ी, दयारतोली, टनकपुर, अमोड़ी, शारदा इंटर कॉलेज बनबसा, गरसाड़ी, चौड़ाकोट, रमक, पाटी, मूलाकोट, रीठाखाल, चौड़ामेहता, देवीधुरा और मध्यगंगोल तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धूरा, कोठेरा, चूलागांव, क्षीणाबांस, लुवाकोट, बिरगुल, निलोटी, कफड़ा विद्यालय।
जिले में माध्यमिक विद्यालयों के जीर्ण-शीर्ण और क्षतिग्रस्त भवनों को ध्वस्त कर नए भवनों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जीर्ण शीर्ण भवनों और चिह्नित कक्षों में किसी भी प्रकार की कक्षाएं संचालित नहीं की जा रही हैं। -जितेंद्र सक्सेना, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
बारिश होते ही स्कूल में हो जाती है छुट्टी
चंपावत। जीआईसी चौमेल के विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट का कहना है कि स्कूल भवन की जर्जर हालात को देखते हुए मामूली बारिश होते ही बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। स्कूल में जो भवन बचे हैं उनमें किसी में स्मार्ट क्लास तो किसी में विज्ञान संबंधित अन्य उपकरण रखे गए हैं। अभिभावक मनोज सिंह, पंकज सिंह, प्रकाश महर, विजय सिंह, कुलदीप फर्त्याल आदि के अनुसार वह जर्जर भवनों में अपने पाल्यों को नहीं भेज सकते हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें