चंपावत में आवासीय कालौनी में तब्दील हुआ मिनी औद्योगिक आस्थान।
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उत्तराखंड राज्य में सिडकुल की स्थापना के बावजूद पहाड़ी जनपद चंपावत की धरती उद्योगों के लिए बंजर साबित हो रही है। चंपावत जिला मुख्यालय में मिनी औद्योगिक आस्थान की स्थापना के 33 साल बाद भी औद्योगिक विकास का हुलिया बदल नहीं पाया है। आलम यह है कि उद्योग लगाने के नाम पर लीज पर उपलब्ध कराई गई मिनी औद्योगिक आस्थान की भूमि पर आवासीय मकानों का निर्माण किया जा रहा है।
राज्य में सिडकुल की स्थापना से चंपावत जिले में भी उद्योगों के फलने-फूलने की उम्मीद जगी थी लेकिन यह उम्मीदें ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकीं। वर्ष 1986 में उद्योग विभाग ने जिला मुख्यालय में मिनी औद्योगिक आस्थान बनाने के लिए तकरीबन पचास नाली भूमि अधिग्रहीत की थी। पुनेठी (छतार) स्थित मिनी औद्योगिक आस्थान में 29 लोगों को विभाग ने 99 वर्ष के लीज पर प्लाट आवंटित किए थे लेकिन इनमें से अधिकतर उद्यमियों ने वहां आवासीय मकान खड़े कर उद्योग धंधों के विकास का सपना चकनाचूर कर दिया है।
हालांकि समय-समय पर प्रशासन की ओर से निष्क्रिय उद्यमियों के प्लाट निरस्त करने की कार्रवाई की बात कही जाती है लेकिन इस कार्रवाई को अमलीजामा पहनाने की हिम्मत आज तक किसी ने नहीं दिखाई है।
सहायक उद्योग महाप्रबंधक जीबी जोशी के अनुसार मिनी औद्योगिक आस्थान में आवंटित प्लाट में उद्योग न लगाने वाले उद्यमियों के प्लाट निरस्त करने की कार्रवाई जल्द अमल में लाई जाएगी।
शासन में धूल फांक रहे हैं नए प्रस्ताव
चंपावत। जिले के कई और स्थानों पर मिनी औद्योगिक आस्थान विकसित करने के लिए 48.98 हेक्टेयर भूमि के प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहे हैं। इसमें खर्ककार्की, गोशनी, टनकपुर, दियूरी, बिंडा तिवारी, खूना बोहरा, डैसली, मऊ, मंच, खेतार, सूखीढांग और बमनपुरी आदि स्थान शामिल हैं। सहायक उद्योग महाप्रबंधक जीबी जोशी का कहना है कि इन स्थलों पर उद्यमियों को उनके उद्योग के अनुरूप भूखंड आवंटित किए जाने का प्रस्ताव है लेकिन ये प्रस्ताव लंबे समय से शासन के समक्ष विचाराधीन है।