मडलक के बगवाली मेले में मजपीपल गांव से देवी रथ को मंदिर ले जाते श्रद्घालु।
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लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना महामारी के चलते नेपाल सीमा से लगे मडलक में भैय्यादूज के मौके पर आयोजित बगवाली मेले की रौनक फीकी रही। तीन गांवों में से मात्र एक गांव से ही मां भगवती की डोलायात्रा निकाली गई। अन्य गांवों से सीमित संख्या में देव डांगर और ग्रामीणों ने जत्थों के रूप में मंदिर में पहुंचकर परिक्रमा की।
सोमवार को कोरोना के चलते इस वर्ष बगोटी, मडलक और देवीमैत बुंगा से मां भगवती की डोलायात्राएं नहीं निकली, जबकि मजपीपल से ग्रामीणों की ओर से मां भगवती की डोलायात्रा निकाली गई। डोले में मां भगवती के रूप में खीम सिंह सवार थे, जो श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे। बगोटी, मडलक, देवीमैत से डोले नहीं उठे। ग्रामीण जत्थों के रूप में मंदिर पहुंचे। सभी गांवों में रविवार रात को जागरण हुआ, जिसमें लोक देवताओं ने अवतरित होकर लोगों के कष्टों का निवारण किया। ऐसी मान्यता है कि भैय्यादूज के दिन मां वैष्णवी अपने माइके देवीमैत में भाइयों का पूजन करने आती हैं। रथ यात्राओं के पीछे बड़ी संख्या में महिलाएं मां के जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। इस मौके पर अध्यक्ष पवन जोशी, पुष्कर बोहरा, लाल सिंह, राकेश, आनंद, दीपक बोहरा, कुंवर सिंह कठायत, नाथ सिंह, पवन धामी, चंचल बोहरा, अमर धामी, त्रिलोक सिंह आदि मौजूद रहे।