मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जहां पशुपालकों को प्रेरित किया जा रहा है, वहीं पशुपालन विभाग किस प्रकार उनके इस कार्यक्रम में पलीता लगा रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण पाटी स्थित पशु अस्पताल से मिलता है। यहां का अस्पताल पिछले चार दिनों से बंद पड़ा है।
क्षेत्र का एकमात्र पशु अस्पताल होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लोग आते हैं और निराश होकर लौट रहे हैं। सुदूर कजीना गांव के पशुपालक महेश जोशी अपने जानवरों के लिए कीड़े की दवा लेने को पांच चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उन्हें न दवा मिल रही है और न ही डॉक्टर। उनको यहां आने में तीन घंटे दुर्गम पहाड़ी की पैदल यात्रा के बाद एक घंटे का टैक्सी से सफर करना पड़ता है।
अमर उजाला की टीम ने पौने 11 बजे जब अस्पताल का दौरा किया तो वहां अस्पताल के कपाट बंद थे। बाहर 20 किमी दूर से आए मंगललेख के दलीप सिंह और नंदन राम अपने पशु के इलाज के लिए अस्पताल खुलने की इंतजारी में बैठे हुए थे। यहां कार्यरत पशु चिकित्सक की कार्यशैली को लेकर लोग खासे नाराज हैं। उधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पीएस भंडारी का कहना है कि इस मामले की जांच कर डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।