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Champawat News: बूम-ब्रह्मदेव हाथी कॉरिडोर में आबादी से सिकुड़ा गलियारा

Tue, 18 Nov 2025 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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टनकपुर (चंपावत)। नंधौर वन्य जीव अभयारण्य बूम-ब्रह्मदेव और किलपुरा-खटीमा-सुरई कॉरिडोर नेपाल के शुक्लाफांटा वन्य जीव अभयारण्य से जोड़ता है। इसमें हाथी और अन्य वन्य जीव पारंपरिक रूप से भोजन और मौसम के अनुसार विचरण करते हैं लेकिन कुछ समय से गलियारे में दोनों ओर सीमा पर मानव गतिविधियां बढ़ने से गलियारा सिकुड़ता जा रहा है। इससे देखने में आ रहा है कि हाथी नेपाल की ओर कम जा पा रहे हैं और वापस लौटते समय शारदा, बूम रेंज में अधिक विचरण कर रहे हैं। हाथी भोजन के लिए फसल को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगल में अधिक अंदर जाने पर मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ रही है।
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पिछले कुछ वर्षों में शारदा रेंज हो या बूम रेंज, खटीमा रेंज में विचरण कर रहे हाथियों के झुंड जंगल से लगे आबादी वाले क्षेत्र में आकर फसल को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसके लिए वन विभाग की ओर से सोलर फेंसिंग भी लगाई गई है। हालांकि आबादी में हाथियों के आकर मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं नहीं हुई हैं लेकिन जंगल के अधिक अंदर जाने पर हाथियों के हमलावर होने के मामले बढ़े हैं। तीन दिन पहले ही शारदा रेंज के गुलियापानी के जंगल में अधिक अंदर तक जाने पर हाथी ने महिलाओं पर हमला किया था। इसमें बिचई निवासी गौरी देवी का उप जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
शारदा वन रेंजर सुनील शर्मा ने बताया कि बूम-ब्रह्मदेव होकर नेपाल के शुक्लाफांटा, राजाजी पार्क तक हाथियों का पारंपरिक गलियारा है। हाथी इसी रास्ते से शारदा नदी पार कर कंचनपुर जिले में प्रवेश करते हैं। इसमें सर्दी के मौसम में शारदा का जल स्तर कम होने पर यह आसानी से पार होते हैं और सितंबर से मार्च तक अधिक संख्या में विचरण होता है। एसडीओ खटीमा शालिनी जोशी ने बताया कि शारदा-बूम- ब्रह्मदेव काॅरिडोर के साथ ही सुरई-किलपुरा-खटीमा कॉरिडोर से हाथी नेपाल के शुक्लाफांटा तक जाते हैं।
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