विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार से जमा जमाया नुस्खा अपनाने की तैयारी में है। 2007 और 2012 के बाद इस बार भी भाजपा महिला उम्मीदवार पर दाव खेल सकती है।
भाजपा में प्रत्याशियों को लेकर इस बार सबसे ज्यादा घमासान मचा है। एक अनार-सौ बीमार वाली ये कहावत बैनर-पोस्टर और होर्डिंग्स के जरिए भी साफ नजर आ रही है। इस सियासी दंगल से पार्टी को भितरघात से लेकर बगावत तक का अंदेशा है।
ऐसे में पार्टी में फिर से महिला उम्मीदवार को लेकर गंभीर हो गई है। उत्तराखंड विधानसभा के लिए अब तक तीन बार हुए चुनाव में भाजपा यहां से सिर्फ एक बार जीती है। ये सीट भी उसे 2007 में महिला प्रत्याशी बीना महराना ने ही दिलाई।
2012 में तत्कालीन जिलाध्यक्ष हेमा (हरिप्रिया) जोशी को पार्टी ने टिकट दिया था। इस सीट पर भाजपा के पास पूर्व राज्य मंत्री बीना महराना का दावा सबसे मजबूत है। पिछली बार वे चुनाव मैदान में नहीं उतरी थीं। इस बार फिर से वे लोगों के बीच जा रही हैं। उनके अलावा पिछली बार प्रत्याशी रहीं हेमा जोशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पांडेय, पूर्व ब्लाक प्रमुख व मौजूदा जिला पंचायत सदस्य निर्मला महराना प्रमुख दावेदारों में हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया का कहना है कि टिकट संसदीय बोर्ड तय करेगा।