पंचायत चुनाव के नतीजों ने प्रत्याशियों के साथ राजनीतिक दिग्गजों को भी आईना दिखाया है। राज्य की जनता का सियासी मूड बताने वाले इन चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। ऐसे में विधायकों की साख भी दांव पर लगी थी। पिथौरागढ़ जिले में चार और चंपावत जिले में दो विधायकों के अलावा उनके समर्थकों ने जिला पंचायत चुनाव में खूब ताकत झोंकी। पढि़ए अंतिम नतीजों के बाद किसके इलाके में क्या हाल रहा...
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपावत में जिला पंचायत की छह सीटें हैं। इनमें से भाजपा अधिकृत प्रत्याशियों ने चार सीटें जीतीं। एक पर भाजपा के बागी चुनाव जीतने में सफल रहे। एक निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। सीएम की विधानसभा में भाजपा मजबूत होकर उभरी है।
लोहाघाट से कांग्रेस के विधायक खुशाल सिंह अधिकारी हैं। यहां जिला पंचायत की तीन सीटें हैं। तीनों सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। एक सीट पर पहले ही भाजपा अधिकृत प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए थे। यहां कांग्रेस कांग्रेस ने कोई भी प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था। इस विधानसभा में बाराकोट, पाटी और लोहाघाट तीन ब्लॉक आते हैं।
धारचूला और मुनस्यारी विकासखंड में जिला पंचायत का चुनाव कांग्रेस विधायक हरीश धामी पर केंद्रित रहा। दोनों विकासखंडों में जिला पंचायत की आठ सीटों पर हुए मुकाबले में कांग्रेस समर्थित तीन प्रत्याशी जीतने में सफल रहे तो इतने ही प्रत्याशी भाजपा जिता सकी। दो सीटों पर निर्दलीयों ने कब्जा जमाया है।
भाजपा विधायक बिशन सिंह चुफाल की विधानसभा डीडीहाट, कनालीछीना और मूनाकोट में 10 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा को छह सीट, कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी एक सीट मिली। तीन निर्दलीय प्रत्याशियों ने मैदान मारा। यहां विधायक बिशन सिंह चुफाल और कार्यकर्ताओं की मेहनत की बदौलत पार्टी समर्थित सबसे अधिक प्रत्याशी जीते हैं।
भाजपा विधायक फकीर राम टम्टा के नेतृत्व वाले गंगोलीहाट और बेड़ीनाग विकासखंड में जिला पंचायत की नौ सीट पर पार्टी समर्थित सिर्फ एक प्रत्याशी जीतने में सफल हुआ जवकि कांग्रेस की झोली में दो सीटें आई हैं। यहां सबसे अधिक छह निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर जिला पंचायत के सदन में पहुंचे हैं।
जिला मुख्यालय के नजदीक विण विकासखंड का नेतृत्व करने वाले कांग्रेस विधायक मयूख महर ने निकाय चुनाव में ही पार्टी से किनारा कर लिया। ऐसे में जिला पंचायत की पांच सीटों वाले इस विकासखंड में भाजपा को इसका सीधा फायदा मिला। यहां भाजपा के चार तो कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रहा है।