घरों से कूड़ा उठाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया चार पहिए वाला ई रिक्शा।
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नगर पालिका ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत घरों से जैविक और अजैविक कूड़ा एकत्र करने के लिए ई रिक्शा चलाने का निर्णय लिया है। जिसके लिए पालिका की ओर से विशेष रूप से तैयार किए गए ई-रिक्शा का बुधवार को जिला मुख्यालय की सड़कों में ट्रायल लिया गया। जो कि पूरी तरह से सफल रहा।
पालिका ने उधमसिंह नगर के सिडकुल उद्योग में चार पहिए वाला विशेष ई रिक्शा तैयार कराया है। पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी के अनुसार बोर्ड की अनुमति के बाद पांच ई-रिक्शा तैयार करने का आर्डर दिया है। जिसमें से दो ई-रिक्शा जिला मुख्यालय पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि विशेष ई-रिक्शा में जैविक और अजैविक कूड़ा एकत्र करने के दो अलग अलग खाने बने हुए हैं। एक ई रिक्शा के निर्माण में करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत आ रही है। बिजली से चार्ज होने वाले ई-रिक्शा के संचालन के लिए पर्यावरण मित्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बिना अनुमति के हो रहा है ई-रिक्शाका संचालन
चंपावत। नगर पालिका की ओर से बिना परिवहन विभाग की अनुमति के ही कूड़ा उठाने के लिए ई रिक्शा का संचालन किया जा रहा है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रश्मि भट्ट के अनुसार पहाड़ी मार्गों में किसी भी प्रकार के ई-रिक्शा चलाने की अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि कूड़ा उठाने के लिए नगर पालिका चंपावत की ओर से किसी प्रकार के ई-रिक्शा के संचालन की अनुमति नहीं ली गई है। इससे पूर्व एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की ओर से भी मुख्यालय में सवारी और सामान ढोने वाले ई-रिक्शा का ट्रायल किया था। लेकिन परिवहन विभाग की अनुमति नहीं मिलने पर ई रिक्शा का संचालन नहीं हो पाया। इधर पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी का कहना है कि अभी इस संबंध में परिवहन विभाग में पंजीकरण की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अलबत्ता बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंचे केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने पालिकाध्यक्ष के साथ ई रिक्शा का आनंद उठाया।
एक दिन भी नहीं चली आठ लाख की कांपेक्टर मशीन
चंपावत। नगर पालिका की ओर से भले ही कूड़ा उठाने के लिए ई-रिक्शा का प्रयोग किया जा रहा हो। लेकिन नागरिकों का कहना है कि ई-रिक्शा योजना भी कहीं कांपेक्टर मशीन की तरह ही धराशायी न हो जाए। बताते चलें कि पालिका की ओर से कूड़े की रिसाइकिलिंग के लिए तीन साल पूर्व करीब आठ लाख रुपये की लागत की कांपेक्टर मशीन लगाई गई थी। इस मशीन में पॉलिथीन के कूड़े को रिसाईकिल कर उसके ईंधन संबंधी ब्लाक तैयार किए जाने थे। लेकिन सेलाखोला वन पंचायत की भूमि में लगाया गई कांपेक्टर मशीन आपरेटर न होने के कारण महज शो पीस बन गई है। इस मशीन का उपयोग एक दिन भी नहीं किया गया। जिससे वर्तमान में यह क्षतिग्रस्त हालात में है तथा उसके चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं।
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ट्रंचिंग ग्राउंड के निर्माण के लिए नहीं मिली भूमि
चंपावत। जिला मुख्यालय में प्रतिदिन निकलने वाले तीन टन जैविक और अजैविक कूड़े का निस्तारण बड़ी समस्या बनते जा रहा है। एक साल पूर्व मानवाधिकार आयोग की ओर से जिला प्रशासन को कूड़े के निस्तारण के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड की जमीन तलाशने के निर्देश दिए जाने के बाद अब तक भी वांछित भूमि नहीं मिल पाई है। जिस कारण ललुवापानी रोड में सर्किट हाउस के समीप खुले में कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार के अनुसार ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि की तलाश जारी है।