चंपावत। चंपावत जिले में हिंदी भाषा को सीखाने के लिए शिक्षकों का टोटा है। जिले में हिंदी पढ़ाने वाले प्रवक्ताओं के दस पद खाली हैं।
जिला मुख्यालय के जीजीआईसी में हिंदी पढ़ाने के लिए कोई नहीं हैं। चंपावत जीजीआईसी में प्रवक्ता तो है ही नहीं, सहायक अध्यापक भी नहीं है। प्रभारी प्रधानाचार्या भुवनेश्वरी फोनिया का कहना है कि छठीं से इंटर तक के सभी 509 छात्राओं को हिंदी पढ़ाने के लिए शिक्षिक नहीं है। काम चलाने के लिए अभिभावक संघ के कोष से एक शिक्षिका की व्यवस्था की गई है।
जिले के 105 जीआईसी, जीजीआईसी और राजकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में से हिंदी के 110 प्रवक्ताओं में से दस और एलटी में छह शिक्षकों की कमी है। जिले में तीन हजार छात्र-छात्राओं को हिंदी की सीख देने के लिए एक भी शिक्षिका नहीं है। शिक्षकों की कमी का असर यह हो रहा है कि कई स्कूलों में दूसरे विषयों के शिक्षक हिंदी पढ़ाने को मजबूर हैं। छात्राओं का कहना है कि शिक्षकों की कमी से हिंदी विषय की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं कई स्कूलों में एलटी शिक्षकों के जरिए इंटर के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। संवाद
सरकारी कॉलेजों में हिंदी और अन्य विषयों के खाली पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। पद नहीं भरे जाने तक अभिभावक संघ या दूसरे माध्यमों से वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश हो रही है।
-जितेंद्र सक्सेना, सीईओ, चंपावत।