लोहाघाट। जंगलों में लगी आग थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को जंगलों में आग लगने के कारण दिन भर बाजार में भी धुंध छाई रही, जिस कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई। लोहाघाट के भुमलाई और बलांई के जंगलों में मंगलवार देर शाम से आग लगनी शुरू हो गई थी, जिस कारण पूरे क्षेत्र में धुआं फैल गया। बाराकोट के जंगलों में भी भारी मशक्कत के बाद आग पर आंशिक रूप से काबू पाया गया।
शिक्षक नगेंद्र जोशी ने बताया कि उनके सामने लड़ीधूरा के जंगल में आग लगने के कारण जंगली जानवरों की मौत के साथ ही वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। काली कुमाऊं रेंज के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र घाट और छीड़ापानी के जंगलों में आग लगने से लाखों रुपये की वन संपदा जल गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्होंने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वन विभाग के कर्मियों का कहीं भी अता-पता नहीं है। रेंजर दीप जोशी और एनके पंत का कहना है कि वह हर क्षेत्र में अलग-अलग विभागीय टीम भेजकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।
पाटी। जंगलों में लगी आग से वन संपदा को भी भारी क्षति पहुंच रही है। मंगलवार रात बालातड़ी के जंगलों की आग इस तरह बेकाबू हो गई कि लगभग एक दर्जन से अधिक चीड़ के पेड़ जल गए। इतना ही नहीं ये पेड़ बिजली के तारों में गिरने से एक दर्जन से अधिक गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई।
बमुश्किल विद्युत विभाग के कर्मियों ने कुछ एक गांवों में विद्युत आपूर्ति बहाल की, लेकिन बुधवार को फिर भिंगराड़ा गेस्ट हाउस के पास विशाल पेड़ गिरने से विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। विद्युत विभाग के कर्मचारी घनश्याम भट्ट ने बताया कि बड़ी संख्या में विद्युत लाइनें ध्वस्त हुई हैं। जल्द ही क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। वहीं, रीठासाहिब गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह ने बताया कि जंगल की आग दिनों-दिन परेशानी का सबब बन रही है, जिस कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी हो रही है।