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पीपीपी मोड की तुलना में बेहतर है सरकारी व्यवस्था

Wed, 13 Jan 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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आखिरकार लोगों को अब यह महसूस होने लगा है कि पीपीपी मोड में दी जा रही चिकित्सा व्यवस्था की तुलना में सरकारी व्यवस्था कहीं अधिक बेहतर है। पिछले 14 दिनों से पीपीपी मोड के डॉक्टरों एवं अन्य कर्मचारियों की हड़ताल से निपटने के लिए सरकारी तौर पर सीएमएस डा.मंजीत सिंह के नेतृत्व में जो प्रबंध किए गए हैं, उसने हड़ताल को बेअसर कर दिया है।
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डा.सिंह के नेतृत्व में डा.जितेंद्र जोशी, डा.जफर, डा.सुनील गिरि, डा.राजेश एवं डा.केसी ततराड़ी की ओर से जो सेवाएं दी जा रही हैं, उससे रोगियों को काफी राहत मिल रही है। इस बीच सभी दवाइयां लोगों को सरकारी तौर पर ही उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही रोगियों की संख्या में भी कोई कमी नहीं आ रही है।

जानकारों का कहना है कि पीपीपी मोड में जहां सरकार शील प्रबंधन को 25 से 28 लाख रुपये प्रतिमाह दे रही है, यहां वर्तमान में छह लाख रुपये में सारा कार्य हो रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा का कहना है कि पीपीपी मोड की व्यवस्था तत्काल समाप्त की जानी चाहिए। यहां कार्यरत डॉक्टर भी मौजूदा व्यवस्था में काम करने को मानसिक तौर पर तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें समय से वेतन नहीं मिल पाता है। सीएमएस डा.मंजीत सिंह स्वयं झाडू़ तक लगा रहे हैं। उनके इस कार्य में 108 कर्मी भवान सिंह, एलडी जोशी, दीपक साह भी सहयोग कर रहे हैं।
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रोगियों को लेकर है अस्पताल का अस्तित्व
सीएमएस डा.मंजीत सिंह का कहना है कि रोगियों को लेकर ही अस्पताल का अस्तित्व है। यदि उनके नाम पर हम सारी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं और उन्हीं को सुविधा नहीं देते हैं तो इस अपराध के लिए ऊपर वाला माफ नहीं करेगा।

ततराड़ी ने दी होम्योपैथी को पहचान
डा.केसी ततराड़ी के प्रयासों से होम्योपैथी चिकित्सा को पहचान दी है। अब तक इस पैथी की ओर लोगों का कोई रुझान नहीं था। डा.ततराड़ी के ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, चर्म रोग समेत सभी पेट संबंधी रोगों का होम्योपैथिक पद्धति से सफल इलाज किए जाने के कारण यहां रोज रोगियों की भीड़ लगी रहती है।
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