चंपावत। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा ने पिछले माह चंपावत और बागेश्वर में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कार्यवाही के निर्देश प्रशासन को दिए जबकि वर्ष 2015 में मंजूर बेस अस्पताल के लिए पौने छह साल बाद भी न स्वास्थ्य विभाग के नाम जमीन हो सकी और न ही बजट मिला।
शासन ने 10 अप्रैल 2015 को जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर बेस अस्पताल बनाने की अनुमति दी लेकिन 70 महीने बाद भी जमीनी हकीकत नहीं सुधर सकी। बेस अस्पताल के लिए राजस्व अभिलेखों में जमीन तक दर्ज नहीं हो सकी जबकि कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम (सीएनडीएस) ने पहले चरण के काम के लिए 276.70 लाख रुपये का आगणन मंजूरी के लिए भेजा था।
उच्चीकरण प्रक्रिया के तहत जिला अस्पताल की 60 शैय्याएं बेस अस्पताल में बढ़कर 300 हो जाएंगी। अति विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होगी। एमआरआई, सीटी स्कैन आदि चिकित्सा परीक्षण की सुविधाएं भी मिलेंगी। अभी इन सुविधाओं के लिए मरीजों को हल्द्वानी, बरेली, पीलीभीत तक जाना पड़ रहा है। चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति के नेता बसंत तड़ागी का कहना है कि बेस अस्पताल की राह में आ रही अड़चन को जल्द दूर किया जाना चाहिए।
जिला अस्पताल में खाली हैं विशेषज्ञों के ये पांच पद
ईएनटी, प्लास्टिक सर्जन, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, हृदयरोग विशेषज्ञ।
जिला अस्पताल में सफेद हाथी बन रहे आईसीयू
चंपावत। 27 डॉक्टरों वाले जिला अस्पताल चंपावत में मरीजों को खास सुविधा नहीं मिल पा रही है। ज्यादातर जटिल मामले रेफर होना आम है। जिला अस्पताल सहित जिले में एक भी जगह सघन निगरानी इकाई (आईसीयू) संचालित नहीं हो सके। (ब्यूरो)
कोट
बेस अस्पताल के लिए अस्पताल से लगी रोजिन फैक्ट्री के पास पांच नाली जमीन स्वास्थ्य विभाग के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। वहीं 2.76 करोड़ रुपये का बजट मंजूर करवाने के लिए 25 जनवरी को स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा गया है।