जिले के सीमांत मोस्टा गांव में सोमवार को हुए ततैये के हमले में वृद्धा की मौत के बाद उसके 12 वर्षीय पोते की भी देर रात मौत हो गई। घटना को लेकर गांव में कोहराम मचा है। इस संबंध में क्षेत्र के ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने मंगलवार को एडीएम से मुलाकात कर पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई है।
सोमवार को नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के मोस्टा बकोड़ा ग्राम पंचायत की बुजुर्ग महिला कमला देवी (70) पत्नी इंद्र सिंह पर ततैयों के झुंड ने हमला बोल दिया था। वह अपने पोते रोशन पुत्र सुंदर सिंह के साथ पेंशन लेने भारतीय स्टेट बैंक की मंच स्थित शाखा को जा रही थी। ततैयों के हमले में जहां कमला देवी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, वहीं पोता भी जख्मी हुआ था।
सौराई के पूर्व प्रधान दान सिंह और मंच के सामाजिक कार्यकर्ता राहुल सिंह महर ने बताया कि समय से इलाज न मिलने के कारण रोशन सिंह ने भी दम तोड़ दिया। इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एडीएम से मुलाकात कर घटना से प्रभावित परिवार को आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई है।
पूर्व प्रधान दान सिंह बोहरा, विपिन जोशी, नवीन सिंह बोहरा, कैलाश जोशी, राजेंद्र सिंह, शीष राम, नाथ सिंह आदि ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय लाने की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
वर्ष 2005 में हुई थी चार बच्चों की मौत
चंपावत। सीमांत मोस्टा गांव में ततैयों के हमलों में दो लोगों के मारे जाने के अलावा वर्ष 2005 में भी जिले के दो सीमांत गांवों में ततैयों के हमले से चार बच्चों की मौत हो चुकी है। सीमांत क्षेत्र के नीड़ गांव के खुन्याल तोक में दशहरा पर्व के दिन मंदिर की सफाई कर रहे बच्चों पर ततैयों ने हमला कर दो बच्चों को मौत के घाट उतार दिया था, जबकि उसी दिन लोहाघाट विकासखंड के पढालना में गायों को चराने गए दो बच्चों की मौत भी ततैयों के हमले से हुई थी।