जिले में नकदी का संकट बरकरार बना हुआ है। कई कोशिशों के बाद भी जिला मुख्यालय की कैश चेस्ट भारतीय स्टेट बैंक को धन नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्राहकों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। एसबीआई के पास वर्तमान में दो करोड़ रुपये ही उपलब्ध है। यही वजह है कि अब एसबीआई ने अन्य बैंकों को पांच लाख रुपये से अधिक नकदी देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
एसबीआई को बीते पांच मार्च को हल्द्वानी के पंजाब नेशनल बैंक से 30 करोड़ रुपये मिले। इसके बाद 15 मार्च को 14.60 करोड़ रुपये मिले। लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह में बैंक ने आठ करोड़ रुपये सितारगंज शाखा को दे दिए, इससे पहले से ही तंगी से गुजर रहे बैंक में नकदी का संकट और गहरा गया। वर्तमान में एसबीआई के पास दो करोड़ रुपये की उपलब्धता है। इसमें से भी 80 लाख रुपये के सिक्के हैं, जिन्हें ग्राहक ले जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा छोटे नोटों ने दिक्कतों को और बढ़ा दिया है।
इस बीच एसबीआई ने अब अन्य बैंकों को नकदी देने में सीमा तय कर दी है। एक बैंक को अधिकतम पांच लाख रुपये ही दिए जा रहे हैं। शुक्रवार को ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक समेत तमाम बैंकों ने एसबीआई से रुपये की मांग की। लेकिन एसबीआई ने इन बैंकों को नकदी की कमी का हवाला देते हुए पांच लाख रुपये से अधिक धनराशि देने से इंकार कर दिया।
कोट
एसबीआई में नकदी का संकट बरकरार है। बैंक में वर्तमान में दो करोड़ रुपये ही उपलब्ध हैं। नकदी के लिए क्षेत्रीय प्रबंधक अल्मोड़ा को पत्र लिखा जा रहा है।
एनके जौहरी, मुख्य प्रबंधक, एसबीआई।
कोट
नकदी संकट से निपटने के लिए रिजर्व बैंक देहरादून को पत्र लिख 40 करोड़ रुपये की मांग की गई है। जो अभी नहीं मिल पाई है। इस धनराशि मिलने से काफी राहत मिल जाएगी।
आनंद सिंह रावत, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।
शो पीस बने एटीएमे
चंपावत। नकदी संकट का असर एटीएम पर भी पड़ रहा है। शुक्रवार को यूको बैंक, आईडीबीआई, शांत बाजार स्थित एसबीआई एटीएम का शटर डाउन रहा। जिससे लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ा। अलबत्ता एसबीआई के मुख्य एटीएम में रुपये होने से लोगों को राहत मिली।