चंपावत। जहां एक ओर पूरे पहाड़ पर पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं बालेश्वर का नौला पानी से लबालब भरा है। इस नौले से लोगों को भरपूर पानी मिल रहा है। नौले की इस खूबी की वजह नागरिकों का मिला-जुला प्रयास है। इस नौले का उपयोग करने से पहले रोज पास में ही स्थित बालेश्वर मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है। चंद राजा थोर चंद द्वारा 1272 में निर्मित बालेश्वर नौला इतिहास की धरोहर तो है ही, साथ ही लोगों की प्यास बुझाने में भी इसका अहम रोल है।
इसकी सबसे खास खूबी यह कि इसका पानी दूसरे नौलों की तरह अब तक कभी कम नहीं हुआ। जबर्दस्त तपिश और भीषण गर्मी से भी इसका जल स्तर कम नहीं हुआ। इसमें अब भी भरपूर पानी है। करीब चार फीट गहराई वाले इस नौले में जल संवर्द्धन को तमाम उपाय उठाए गए हैं। नौले को गंदगी से बचाने के लिए खास उपाय किए गए हैं।
लबालब भरे इस नौले से पानी निकालने के लिए एक विशेष बाल्टी है। इसी बाल्टी के जरिए दूसरे बर्तनों में पानी भरा जाता है। जल वितरण से पहले रोज नौले के जल से बालेश्वर में जलाभिषेक किया जाता है। बालेश्वर के इस नौले का पानी एकदम शुद्ध है। गंदगी से बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने नौले में न केवल दरवाजा लगाया है, बल्कि दरवाजे में नियमित रूप से ताला भी लगाया जाता है।