मंच/चंपावत। सीमांत तल्ला देश की ग्राम पंचायत बकोड़ा के लोग दशकों से पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। जिला पंचायत की भंडार बोरा सीट पर पंचायत चुनाव में सड़क मुख्य मुद्दा रहेगा। सड़क के अभाव में लोगों को मूलभूत चीजें भी संघर्ष से लेनी पड़ती है। बीमार, घायलों को डोली के सहारे मंच तक 15 किमी डोली से लाना पड़ता है। गांव की पहचान तब होती है जब वहां तक सड़क पहुंचती है। आजादी के 75 साल बाद भी बकोड़ा पहचान से वंचित है। गांव के लोग आज भी गांव तक सड़क पहुंचने की आस लगाए हैं।
हर चुनाव में नेताओं की ओर से वादे किए जाते हैं, लेकिन हर बार गांव की उम्मीदें टूट जाती हैं। गांव में रोजमर्रा का सामान पहुंचाना भी आसान नहीं है। हर सामान की दोगुनी कीमत चुकानी पड़ती है। आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के लिए यह आसान हैं, लेकिन अन्य के लिए आसान नहीं होता है। क्षेत्र की आबादी 400 के करीब है।
पढ़ाई के लिए 30 किमी पैदल सफर
गांव के बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए रोज 30 किमी जंगल का रास्ता तय कर जीआईसी मंच जाना पड़ता है। बरसात में यह रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो जाते हैं। मजबूरी में बच्चों को वही रास्ता अपनाना पड़ता है। गांव में कोई बीमार हो जाए तो मरीज को डोली या घोड़े के सहारे 15 किमी दूर मंच पहुंचाना पड़ता है। बरसात के मौसम में इस रास्ते पर चलना जोखिम भरा होता है।
कोट
हर चुनाव में सड़क को पहली प्राथमिकता बताया जाता है, लेकिन आज तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। विभाग काम तो कर रहे हैं, लेकिन सड़क कब पहुंचेगी यह पता नहीं है। - महेंद्र रावत, निवर्तमान प्रधान, बकोड़ा।
कोट
ग्राम पंचायत बकोड़ा के बच्चों के लिए पढ़ाई आसान नहीं है। हर रोज पैदल चलकर मंच पहुंचना और फिर वापस आकर पढ़ना आसान नहीं होता है। गांव के लोगों का दर्द समझने की जरूरत है। सोनी बोहरा, स्थानीय, बकोड़ा।