देवीधुरा में लौह उपकरणों की बिक्री करते स्थानीय कारोबारी। संवाद
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। मान्यता है कि बगवाल देखना शुभ होता है लेकिन उनकी किस्मत ऐसी नहीं कि वे बगवाल देख सकें। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई शहरों से यहां बड़ी संख्या में कारोबारी आते रहे हैं और इस बार भी 300 से अधिक व्यापारी देवीधुरा के बगवाल मेले में पहुंचे हैं। उनकी बेबसी है कि वे कभी भी बगवाल के साक्षी नहीं बन सके। 27 अगस्त से शुरू देवीधुरा के बगवाल मेले में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं, मथुरा से व्यापारी यहां पहुंचे हैं। 31 अगस्त को बगवाल तो निपट गई लेकिन 10 सितंबर तक मेला चलेगा।
बगवाल देखने की हसरत खूब है लेकिन दुकान की वजह से कभी बगवाल देखने का सुअवसर नहीं मिल सका। - राजू, नवाबगंज, बरेली।
बगवाल देखने का सपना अधूरा है। कभी मैदान नहीं जा सके लेकिन टेलीविजन और सोशल मीडिया के जरिए बगवाल देख लेते हैं। - विकास कुमार, गया, बिहार।
अचंभित करने वाली बगवाल की जानकारी अखबार से मिलती है। कारोबार की मजबूरी बगवाल देखने के लिए जाने से रोकती है। - इम्तियाज, बरेली।
बगवाल देखने की इच्छा काम की व्यस्तता से पूरी नहीं हो सकी। दुकान लगाने से पहले और यहां से जाने से पूर्व देवी से आशीर्वाद जरूर लेते हैंं। - राहुल, बरेली।