फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां पूर्णागिरि धाम से जुड़ा है नेपाल के बाबा सिद्धनाथ धाम का महात्म्य

Mon, 15 Apr 2019 11:15 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन राजेश देउपा टनकपुर (चंपावत)।
विज्ञापन
नेपाल के खल्ला नामक स्थान पर स्थापित बाबा सिद्धनाथ का मूल प्राचीन मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

 उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा की अहम कड़ी नेपाल स्थित बाबा सिद्धनाथ धाम से भी जुड़ी है। यही वजह है कि मां के दर्शन को आने वाले यात्री नेपाल जाकर बाबा सिद्धनाथ के दर्शन कर यात्रा पूरी करते हैं। पूर्णागिरि धाम के साथ ही इन दिनों नेपाल के सीमांत ब्रह्मदेव और महेंद्रनगर बाजार में भी मेेले की खासी चहल-पहल बनी हुई है।

विज्ञापन


मां पूर्णागिरि धाम के साथ बाबा सिद्धनाथ का महात्म्य भी जुड़ा है। कहा जाता है कि बाबा सिद्धनाथ देवी पूर्णागिरि के भक्त थे जो नित्य देवी के दर्शन के लिए दरबार में हाजिरी लगाते थे। मान्यता है कि एक दिन देवी पूर्णागिरि अपने शयन कक्ष में श्रृंगार कर रही थीं कि इस बीच अचानक बाबा सिद्धनाथ देवी के शयन कक्ष में प्रवेश कर गए जिससे क्रोधित होकर देवी ने बाबा के शरीर के टुकड़े कर हवा में उठाल दिए।

जब देवी को पता चला कि शयन कक्ष में प्रवेश करना वाला कोई और नहीं उनके अनन्य भक्त बाबा सिद्धनाथ थे तो देवी को पछतावा हुआ। तब देवी ने बाबा को वरदान दिया कि मेरे दर्शन के बाद बाबा सिद्धनाथ के दर्शन करने से ही श्रद्धालुओं की यात्रा और मनोकामनाएं पूरी होंगी। बताया जाता है कि बाबा सिद्धनाथ के शरीर के टुकड़े जहां-जहां गिरे वहां अलग-अलग रूप में उनके मंदिर स्थापित हुए। पूर्णागिरि धाम के ठीक सामने नेपाल में भी बाबा के शरीर का एक टुकड़ा गिरा था जहां बाद में बाबा का मंदिर स्थापित हुआ।
विज्ञापन


नेपाल के खल्ला नामक स्थान पर है बाबा सिद्धनाथ का मूल मंदिर
टनकपुर (चंपावत)। मां पूर्णागिरि धाम के महात्म्य से जुड़े नेपाल के बाबा सिद्धनाथ का मूल और प्राचीन मंदिर नेपाल के खल्ला नामक स्थान पर स्थापित है। बाबा के इस मूल मंदिर में वही श्रद्धालु जाते हैं जिसे इस मूल मंदिर के महात्म्य की जानकारी है। मूल मंदिर पुजारिन माई नर्मदा पुरी के मुताबिक इस मूल मंदिर में चढ़ावे में सत्रहवीं शताब्दी के सिक्के मिले हैं जो इस मंदिर के प्राचीन होने का प्रमाण है। ब्रह्मदेव के उत्तरी छोर पर स्थित इस मूल मंदिर में पहुंचने का रास्ता दुर्गम है। इस कारण संवत 2056 में ब्रह्मदेव और महेंद्रनगर में बाबा सिद्धनाथ के मंदिर स्थापित किए गए हैं।

भक्तिरस में डूबा है पूर्णागिरि मेलाक्षेत्र
टनकपुर/ बनबसा । पूर्णागिरि शक्तिपीठ में तीर्थयात्रियों की आवाजाही का सिलसिला जारी है। डोला लेकर भक्ति गीतों पर थिरकते दर्शन को जाते श्रद्धालुओं की टोलियों से समूचे क्षेत्र में भक्तिरस का अनूठा वातावरण बना हुआ है।  मां पूर्णागिरि धाम के दर्शनों बाद बाबा सिद्धनाथ के दर्शनों को भारी संख्या में श्रद्धालु नेपाल जा रहे हैं। सिद्धनाथ मंदिर भले ही नेपाल में स्थित हो परंतु यह मंदिर पूर्णागिरि धाम का महत्वपूर्ण अंग है। पूर्णागिरि के दर्शनार्थियों के लिए टनकपुर अग्रवाल सभा के अध्यक्ष और प्रमुख व्यवसायी महेंद्र बंसल ने टनकपुर बैराज पर मां दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना उपरांत भंडारा आयोजित किया। इस मौके पर दीनदयाल अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, पुरुषोत्तम अग्रवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह रावत आदि ने सहयोग दिया। उधर, शारदा बैराज चौकी प्रभारी एसआई गोविंद सिंह ने बताया कि सोमवार को बनबसा से करीब एक हजार भक्त महेंद्रनगर स्थित सिद्धनाथ बाबा के दर्शन को गए, जबकि रविवार को अवकाश होने के चलते करीब पच्चीस हजार से अधिक भक्तों ने सिद्धनाथ बाबा के दर्शन किए।  

मां पूर्णागिरि धाम की निगालीगाड़ पेयजल योजना दुरुस्त होने के बाद टुन्यास और सिद्धमोड आदि क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था सुचारु हो गई है। जल संस्थान के जेई बीएस कुवार्बी ने बताया कि दो दिन पहले क्षतिग्रस्त हुई पाइप लाइन दुरुस्त कर पेयजल सप्लाई सुचारु कर दी गई है। पेयजल व्यवस्था चरमरा जाने से मेला क्षेत्र में पेयजल संकट पैदा हो गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें