चंपावत के खेतीखान में महिला स्वयं सहायता समूह की ओर से तैयार की जा रही हैं राखियां।
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चंपावत। जिला मुख्यालय से 29 किमी दूर सेनानियों के गांव खेतीखान को अब नई पहचान मिल रही है। इस इलाकेे में एक महिला समूह हिमालयन ब्लूम्स प्रशिक्षण देेकर महिलाओं को हुनरमंद बना रही है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रतिभा चार साल से हिमालयन ब्लूम्स नाम की संस्था के जरिये राखी बनाकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ रही है। संस्था की न केवल राखी सस्ती है, बल्कि काफी महिलाओं को स्वरोजगार भी मिल रहा है। समूूह द्वारा तैयार राखी की कीमत दो रुपये से 60 रुपये तक है। इस बार महिला समूह ने 14 हजार राखियां रंग कर मिशन के तहत भेजी गई हैं, जबकि दस हजार राखियां विदेशों को ऑनलाइन बेची जा चुकी हैं। संस्था ने स्थानीय बाजार में पांच हजार राखियां बेचने का लक्ष्य रखा है।
खेतीखान और लोहाघाट में इस समूह की 90 महिलाएं घर में ही राखी तैयार कर रही हैं। संस्था की ओर से इस बार 30 हजार राखियां बनाई गई हैं। महिलाओं को सिलाई-बुनाई-कढ़ाई-क्रोशिया सिखा कर आत्मनिर्भर बनाने की ओर अग्रसर किया जा रहा हैं। इन महिलाओं की ओर से तैयार किए गए सामान हाथोंहाथ ऑनलाइन बिक जाते हैं। प्रतिभा बताती हैं कि कुछ महिलाएं तो अब स्वयं सहायता समूह में कार्य करते-करते लैपटॉप चलाना भी सीख गई हैं। सीडीओ आरएस रावत कहते हैं कि गांव की महिलाएं समूह बनाकर अपने-अपने घरों में भी सिलाई-बुनाई का काम कर कमाई कर रही हैं। उनकी बनी राखियां चाइनीज राखियों से बेहतर हैं तथा अब बड़ी-बड़ी कंपनियों की ओर से खूब मांग भी की जा रही है।
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बालिकाओं को घर में राखी बनाना सिखा रहीं गीता
टनकपुर (चंपावत)। विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की शिक्षिका गीता प्रजापति इन दिनों बालिकाओं को घर में राखी बनाना सीखा कर उन्हें भविष्य में स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही है। कोरोना संक्रमण के कारण इन दिनों स्कूल बंद है और बच्चे घरों से बाहर कम निकल रहे हैं। ऐसे में कोरोना संकटकाल को अवसर में बदलते हुए शिक्षिका गीता अपने विष्णुपुरी कॉलोनी स्थित घर में आसपास की बालिकाओं को सुरक्षित दूरी का पालन कराते हुए विभिन्न तरह की राखियां बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। शिक्षिका गीता ने बताया कि वह बालिकाओं को समय का सदुपयोग करा घर में रेशम के धागे, ऊन, मोती, विभिन्न प्रकार के धागे और घर में पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं से राखी बनाना सिखा रही हैं। संवाद