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बर्खास्तगी से आक्रोशित आशाओं ने कलक्ट्रेट में किया प्रदर्शन

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चंपावत कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करतीं आशा कार्यकर्ताएं। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिले में एक्टिव सर्विलांस का काम नहीं करने पर 254 आशा कार्यकर्ताओं को बर्खास्त करने के विरोध में शुक्रवार को आशाओं ने जिला प्रशासन और सीएमओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल के साथ नगर पालिका अध्यक्ष विजय वर्मा के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से आए ग्राम प्रधानों ने आशा कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और जिला प्रशासन से आशाओं को बहाल करने की मांग की है।
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आशाओं का कहना है कि उनके पास स्मार्टफोन न होने के कारण और क्षेत्र में नेटवर्क ना होने के कारण उन्होंने रजिस्टरों में दो महीने तक ऑफलाइन काम किया है। काम करने के बाद भी जिला प्रशासन ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है। आशाओं ने बताया कि स्मार्टफोन न होने के कारण अधिकांश आशाएं एक्टिव सर्विलांस का काम ऑफलाइन कर रही थीं। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग से न उन्हें सैनिटाइजर उपलब्ध कराया और न ही मास्क दिए। सीएमओ डा.आरपी खंडूरी का कहना है कि कई दौर की वार्ता के बाद आशाओं की ओर से जब एक्टिव सर्विलांस का काम नहीं किया गया तब जाकर डीएम के निर्देश पर उन्हें बर्खास्तगी का नोटिस थमाया गया है।
ज्ञापन भेजकर किया प्रदर्शन
टनकपुर। आशा वर्करों ने उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले तहसील में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने आशा वर्करों को बर्खास्त किए जाने को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई है। यूनियन की अध्यक्ष मीरा कश्यप के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में सचिव दुर्गा देउपा, शकुंतला भंडारी, मंजू जोशी, मुन्नी बिष्ट, कविता बसेड़ा, लीला नेगी, प्रतिला, शीला मौनी, दीपा, भुवनेश्वरी भट्ट, निर्मला महर, रीता उप्रेती, मंजू गड़कोटी, पूनम सक्सेना, मोहनी जुकरिया, सुनीता, जानकी देवी आदि शामिल थीं। संवाद
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धरना प्रदर्शन और समर्थन देने में ये रहे शामिल
चंपावत। आशा संगठन की जिलाध्यक्ष सरोज पुनेठा, ब्लाक अध्यक्ष रुकमणी जोशी, पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल, पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, राजेंद्र पुनेठा, योगेश खर्कवाल, विनोद बडेला, दीपक खर्कवाल, दान सिंह बोहरा, विपिन जोशी, राम सिंह महर, ग्राम प्रधान मनोज तड़ागी, विनीता पांडेय, संगीता प्रहरी, हेमंती जोशी, उमा देवी, लक्ष्मी पांडेय, बसंती जोशी सहित सभी आशा कार्यकर्ता शामिल रहे।
आशा कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
दिन रात काम करने के बाद भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशाओं के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है। स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण सभी आशाओं ने ऑफलाइन सर्वे कार्य किया है। - संगीता प्रहरी, बालेश्वर वार्ड।
कोरोना महामारी के दौरान आशाएं पूरे मनोयोग से क्वारंटीन सेंटरों की देखरेख करने के साथ ही विभाग की ओर से दिए गए दायित्वों को बखूबी निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें बर्खास्तगी का नोटिस थमा दिया गया। - हेमंती जोशी, मंच दुबडजैनल।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशाओं को न तो स्मार्ट फोन ही दिए गए हैं। न ही आशाओं को मास्क और सैनिटाइजर दिया जा रहा है। बावजूद इसके आशा कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से अपना कार्य कर रही हैं। - विनीता पांडेय, पाटनपाटनी।
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कोविड-19 में आशाओं की ड्यूटी तो लगाई गई है लेकिन उन्हें इसके लिए कोई भी मानदेय या प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा है। जबकि आशाओं की नियुक्ति शिशु और मातृ मृत्युदर रोकने के लिए की गई थी। - बसंती जोशी, कोलीढेक।
आशाओं की ओर से लगातार दिन रात विभागीय निर्देशों का पालन किया जा रहा है लेकिन आशाओं को प्रोत्साहित करने के बजाए उन्हें बर्खास्तगी की चेतावनी दी जा रही है। इसका विरोध किया जाएगा। - लक्ष्मी पांडेय, शक्तिपुरबुंगा।
स्मार्टफोन न होने के कारण आशाओं ने आफलाइन रजिस्टरों में एक्टिव सर्विलांस की सर्वे दर्ज की है। विभागीय अधिकारियों को उन रजिस्टरों का अवलोकन करना चाहिए, न कि आशाओं को दंडित किया जाए। - उमा जोशी, भगानाभंडारी।
क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किया जाना किसी भी नजरिए से जायज नहीं है। जरूरत पड़ी तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर आशाओं के साथ जनांदोलन करेगी।- हेमेश खर्कवाल, पूर्व विधायक।
आशाओं की बर्खास्तगी का क्या कारण रहा है इसके लिए प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर समाधान तलाशा जाएगा। किसी भी आशा कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव तथा अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। - कैलाश गहतोड़ी, विधायक।
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