लोहाघाट । अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आशा वर्कर्स संगठन ने प्रदर्शन किया। आशाओं ने चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। शीघ्र उनकी मांगें पूरी न होने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। सोमवार को आशा वर्कर्स संगठन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा के नेतृत्व में आशाओं ने सरकार से अपनी मांगों को लेकर उप जिला अस्पताल में प्रदर्शन किया।
आशाओं का कहना था कि कोरोना काल में वह फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें न तो कोरोना महामारी बचाव के लिए पीपीई किट और न ही उन्हें कोरोना की पहली लहर से कोरोना भत्ता दिया गया है। आक्रोशित आशाओं ने चिकित्साधीक्षक डॉ.जुनैद कमर से माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर उन्हें कोरे आश्वासन देने का आरोप लगाया। आशाओं ने बिना किसी शर्त के उनका 50 लाख रुपये का जीवन बीमा और 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा करने, 10 हजार रुपये मासिक कोरोना भत्ता देने, आशाओं के परिवार के सदस्यों को कोविड वैक्सीन लगाने आदि की मांग की। मांगें पूरी नहीं होने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। इस मौके पर रीता सिंह, चंपा राय, पदमा प्रथोली, पुष्पा बोहरा, रीना सिंह, ममता देवी, माला देवी, पुष्पा बोहरा, आइसा बानो, निर्मला बोहरा, हेमा कलौनी, कौशल्या पांडेय आदि मौजूद रहे।
आशाओं ने उठाई कोविड सुरक्षा किट और दस हजार मासिक भत्ते की मांग
टनकपुर (चंपावत)। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने 31 मई को मांग दिवस के रूप में मनाते हुए कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगे आशा और स्कीम वर्करों को संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षा किट व दस हजार रुपये मासिक भत्ता देने की मांग उठाई। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा है। सोमवार को एसडीएम हिमांशु कफल्टिया के माध्यम से भेजे गए मांग पत्र में कहा गया है कि ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के बैनर तले आशा कार्यकर्ता समेत सभी स्कीम वर्कर कोरोना महामारी की रोकथाम में योगदान दे रहे हैं, लेकिन संक्रमण से उनकी सुरक्षा और सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मांग पत्र देने वालों में लीला ठाकुर, लीला नेगी, बबीता महर, मोहनी, जानकी, सुनीता, गीता खर्कवाल, मंजू गड़कोटी, विमला महर, शीला मौनी, दुर्गा देउपा, मीरा कश्यप आदि शामिल थे। (संवाद)