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महला सुरक्षा को स्थायी और दीर्घकालिक उपाय जरूरी

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अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत महिला सशक्तीकरण का संकल्प लेती महिलाएं। - फोटो : LOHAGHAT
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हैदराबाद और उन्नाव में बेटियों के साथ हुए दुष्कर्म और जिंदा जलाने की करतूत से यहां की महिलाएं भी सहमी हैं। महिलाओं में गहरा गुस्सा है। रविवार को मल्लिकार्जुन पब्लिक स्कूल में अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के बैनर तले ‘कब तक निर्भया’ विषय पर हुए संवाद में महिलाओं ने बेबाकी से विचार रखे।
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हैदराबाद में चारों आरोपियों को 6 दिसंबर को पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने से महिलाओं में खुशी है। उन्नाव के दरिंदों के साथ भी महिलाएं ऐसा ही अंजाम चाहती हैं। महिलाओं का कहना है कि महिला सुरक्षा को लेकर स्थायी व दीर्घकालिक कदम उठाए जाने चाहिए। परिवार से लेकर समाज तक का नजरिया बदले और सिस्टम महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने को प्राथमिकता से कदम उठाए।
बाद में महिलाओं ने अपराजिता की शपथ ली। संवाद में शिक्षिका विमला बोहरा, दीपिका पुनेठा, रेखा जोशी, मनीषा राय, विनीता पांडेय, यामिनी पुनेठा, प्रीति उप्रेती, शिवानी साह, नेहा विश्वकर्मा, संगीता ढेक, सुनीता सुतेड़ी, राधिका पांडेय, मंजू अधिकारी, भावना, पांडेय आदि शामिल थीं।
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महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले दरिदों को तत्काल कड़ी सजा देनी चाहिए। सजा मिलने में देरी से केस कमजोर पड़ता है। आरोपी को जमानत भी नहीं मिलनी चाहिए ताकि वह किसी तरह से मामले को प्रभावित न कर सके। संगीता ढेक।
दुष्कर्म करने वालों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनें ताकि वारदात के तत्काल बाद आरोपी को सरेआम फांसी पर लटका दिया जाए। इस तरह की सजा से असामाजिक तत्वों की करतूतों में कमी आएगी। विनीता पांडेय।
महिलाओं के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ ऐसे कड़े कानून बनें जिससे कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचेगा। जिस दिन से अपराधियों को तत्काल कड़ी सजा मिलनी शुरू हो जाएगी, उस दिन से अपराधों में कमी आएगी। यामिनी पुनेठा।
बेटियों को बहादुर बनाना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे बेटियों को बेटों के समान सभी सुविधाएं मुहैया कराएं। यदि कोई व्यक्ति बेटियों के साथ छेड़खानी की कोशिश करता है तो उसका विरोध कर सबक सिखाना चाहिए। नेहा विश्वकर्मा।
बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने चाहिए ताकि वह किसी भी हालात में बहादुरी के साथ मुकाबला कर सकें। बेटियों को सूनसान रास्तों और रात के वक्त घर से बाहर अकेली निकलने से यथासंभव बचाया जाए। रेखा जोशी।
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