निर्यात को बढ़ाने की संभावना पर बनबसा में बैठक करते अधिकारी और व्यापारी। संवाद
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बनबसा (चंपावत)। अधिकारियों ने भारत-नेपाल के बीच बनबसा के रास्ते निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं को टटोला। नोएडा सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र) के विकास आयुक्त विपिन मेनन ने कहा कि भारतीय निर्यातकों के शीर्ष निकाय (एफआईईओ) के जरिये शीघ्र ही अध्ययन कराया जाएगा ताकि उत्तराखंड के बेहतर उत्पाद नेपाल को निर्यात किए जा सकें।
बनबसा स्थित सीमा शुल्क (कस्टम) कार्यालय में भारत और नेपाल के अधिकारियों की बुधवार को बैठक हुई जिसमें डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि भारत-नेपाल में गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं। कहा कि सूखा बंदरगाह (ड्राईपोर्ट) के पूरा होने के बाद दोनों देशों के व्यापार में बढ़ोतरी होगी। इससे कारोबार में वृद्धि के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उद्यमियों और व्यवसायियों ने कहा कि बनबसा के कस्टम कार्यालय में मोबाइल नेट की कमजोर कनेक्टिविटी के चलते नेपाल जाने वाली सामग्रियों की शुल्क पर्ची काटने में समय लगता है जिससे सामान के खराब होने का अंदेशा भी रहता है।
डीएम ने मोबाइल कंपनियों के जरिये इस मामले का समाधान खोजने का भरोसा दिलाया। बैठक में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के उपनिदेशक वैभव वाधवान, सहायक निदेशक सुनीता शर्मा, एसडीएम हिमांशु कफल्टिया, कस्टम अधीक्षक सुधाकर तिवारी, एजीएम उद्योग विभाग सोमनाथ गर्ग के अलावा बनबसा के व्यापार संघ अध्यक्ष परमजीत सिंह मौजूद थे।
व्यापार को लेकर महीने में दो बार लगेगा कैंप
बनबसा (चंपावत)। उद्योग विभाग की ओर से हर माह दो बार (शुक्रवार को टनकपुर तहसील और बुधवार को चंदनी बनबसा पटवारी चौकी में) कैंप लगाया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न संस्थाओं के जरिये भी यहां पर व्यापारियों के साथ निर्यात के संबंध में बैठकें कर जानकारी दी जाएगी। संवाद