चंपावत। सरकारी विद्यालयों के 80 फीसदी से अधिक विद्यार्थियों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी तैयार हो गई है, लेकिन निजी विद्यालयों में 77 फीसदी विद्यार्थियों की अपार आईडी बनी हैं। इसे लेकर निजी विद्यालयों को विभाग ने पत्र भेजा है।
विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों की अपार आईडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अपार आईडी बनाए जाने से बच्चों की आइडेंटिटी में आसानी होगी।
समग्र शिक्षा विभाग की ओर से 48,000 से ज्यादा बच्चों की आईडी बनाने का लक्ष्य दिया गया है। अपार आईडी के माध्यम से विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को एक यूनिक आईडी (परिचय) दिया जा रहा है। जिसमें उनकी पूरी जानकारी अपडेट होगी। छात्रों को इससे प्रतियोगी परीक्षा के शुल्क में छूट, लाइब्रेरी और संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश की अलावा अन्य सुविधाएं प्राप्त होंगी।
कोट
पहली से लेकर 12वीं तक के कुल 48,574 विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जानी है। इसमें से सरकारी विद्यालयों ने 88 फीसदी और निजी विद्यालयों ने 77 फीसदी छात्र-छात्राओं की आईडी बनी हैं। शेष बच्चों की आईडी बनाने की प्रक्रिया गतिमान है। सभी विद्यालयों के अध्ययनरत बच्चों में एकरूपता के लिए भी जरूरी है। - मेहरबान सिंह बिष्ट, सीईओ चंपावत।