संवाद न्यूज एजेंसी, टनकपुर (चंपावत)। सोमवार यानी 15 मार्च को उत्तर भारत के सुप्रसिद्व मां पूर्णागिरि धाम के सरकारी मेले की अवधि पूरी हो जाएगी। धाम के इतिहास में यह पहला मौका है जब तीन माह तक चलने वाले मेले को महज छह दिन बाद ही स्थगित करना पड़ा हो। लाखों श्रद्घालु देवी मां के दर्शन से वंचित रहे। बहरहाल धाम के कपाट खुलने के बाद से थोड़ी-थोड़ी संख्या में श्रद्घालुओं की आवाजाही का सिलिसिला बना हुआ है।
हर साल होली के अगले दिन से शुरू होने वाला पूर्णागिरि मेला इस बार मार्च के 11वें दिन शुरू हुआ था। मेला शुरू हुए छह दिन ही हुए थे कि कोरोना की वैश्विक महामारी के कारण मेला स्थगित करना पड़ गया। जिससे मेले में कारोबार से आजीविका की उम्मीद लगाए व्यापारियों के साथ ही धाम के पुजारियों को भी निराश होना पड़ा। ढाई माह से अधिक समय तक धाम के कपाट बंद रहने के बाद गत 8 जून से धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति के बाद पूर्णागिरि धाम के कपाट भी दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ उत्तराखंड के श्रद्घालुओं को ही दर्शन की अनुमति दी गई है।
मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय का कहना है कि कोरोना की वैश्विक महामारी ने ऐतिहासिक पूर्णागिरि मेले में भी बाधा डाली। उनका कहना है कि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगले वर्ष मेले को और भव्य रूप देकर श्रद्घालुओं के लिए सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की जाएगी।
--::: मेला अवधि में हर साल आते हैं 26 से 27 लाख श्रद्घालु :: हर साल आयोजित होने वाले पूर्णागिरि धाम के सरकारी मेला अवधि में करीब 26 से 27 लाख श्रद्घालु देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। उत्तर भारत के साथ ही देश के कोने-कोने से भक्त देवी मां के दर्शन के लिए आते हैं। चैत्र नवरात्र से पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवक होती है।