चंपावत/खटीमा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रभाव वाले गृह क्षेत्र चंपावत और खटीमा के परिणामों पर सबकी नजर है। जनादेश में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की बढ़त ने जो संकेत दिए हैं उसे पार्टी धारी मॉडल की सफलता के रूप में देख रही है।
चंपावत के सभी चारों विकासखंडों की 312 ग्राम पंचायतों के साथ ही क्षेत्र पंचायत की 134 और जिला पंचायत की 15 सीटों में अधिकांश भाजपा की झोली में आए हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि चंपावत को मुख्यमंत्री धामी ने आदर्श जिला बनाने की जो पहल की थी, वह अब धरातल पर उतरती नजर आ रही है। गांव-गांव में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने ग्रामीण जनता को बदलाव की अनुभूति कराई है। इन पंचायत चुनावों के नतीजे बताते हैं कि जनता ने न सिर्फ विकास देखा है, बल्कि उसे अपनाया भी है।
विश्लेषकों का मानना है कि जनता ने इन चुनावों में जाति, क्षेत्रीय समीकरण और भावनात्मक नारों से ऊपर उठकर विकास को प्राथमिकता दी है। भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की जीत यही दर्शाती है। इस पंचायत चुनाव में भाजपा की बढ़त सिर्फ एक संगठन की सफलता नहीं बल्कि मुख्यमंत्री धामी के मॉडल के प्रति जनसमर्थन की अभिव्यक्ति है। चंपावत के जनादेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब काम के आधार पर निर्णय लेती है।
चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जिस क्षेत्र की रही वह था खटीमा विकासखंड का नगला तराई गांव। यह मुख्यमंत्री धामी का पैतृक गांव है। यहां की ग्राम पंचायत, बीडीसी और जिला पंचायत की तीनों सीटें हॉट सीट रहीं। ग्राम प्रधान पद के लिए नगला तराई से 6 प्रत्याशी, बीडीसी के लिए 3 प्रत्याशी और जिला पंचायत के लिए 4 उम्मीदवार मैदान में थे। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा से टिकट न मिलने पर एक कार्यकर्ता ने बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा जिससे भाजपा के सामने बाहरी नहीं अंदरूनी चुनौती भी खड़ी हो गई। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। भाजपा प्रत्याशी मुख्यमंत्री का करीबी माना जा रहा है वहीं कांग्रेस उम्मीदवार की भी स्थानीय पकड़ मजबूत है। वोटों की गिनती के दौरान पूरी रात ग्रामीण और कार्यकर्ता फोन पर अपडेट लेते रहे जिससे पता चलता है कि इस चुनाव को लेकर लोगों की उत्सुकता कितनी ज्यादा है।