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आजादी की जंग में अंग्रेजों से लोहा लेने में आगे रहे चिंतामणि

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. तारादत्त उप्रेती। (फाइल फोटो) - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। चंपावत के छोटे से गांव तलियाबांज के चिंतामणि जोशी ने आजादी की जंग में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। पढ़ाई के साथ ही सामाजिक कार्यों में हिस्सेदारी करने वाले चिंतामणि देश के हालात को देख अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में कूद गए। अंग्रेजों की नाक में दम करने वाले चिंतामणि को तीन माह की जेल की सजा होने के साथ ही उन पर 50 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
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अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए लोगों में देशभक्ति की ज्वाला जगाने के लिए पंडित चिंतामणि ने कुमाऊं के कई हिस्सों का दौरा किया और लोगों को एकजुट किया।। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वर्ष 1942 में गांधी जी के आह्वान पर अंग्रेजों के खिलाफ मैदान में कूद गए। क्षेत्र के कई अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ मिलकर देश को आजाद करने के लिए गुप्त रणनीति बनाई। इसी बीच पकड़े जाने पर अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया।
अल्मोड़ा जेल के बाद उन्हें बरेली जेल भेज दिया गया। उन पर 50 रुपये का जुर्माना भी किया गया। तीन माह तक जेल में दी गई प्रताड़ना की परवाह न कर रिहा होने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम जारी रखी। उनके बेटे सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त निरीक्षक प्रकाश जोशी बताते हैं कि देश की आजादी के बाद भी पिता चिंतामणि जोशी सामाजिक कार्यों में तल्लीन रहे। आजादी की रजत जयंती अवसर पर 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र भेंट किया।
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जंग-ए-आजादी में दो जेलों में रहे थे डॉ. उप्रेती
लोहाघाट (चंपावत)। जंग-ए-आजादी में छोटे जिले चंपावत का बड़ा योगदान रहा है। इस स्वतंत्रता संग्राम में लोहाघाट ब्लॉक के डॉ. तारा दत्त उप्रेती ने भी हिस्सा लिया। वह जेल गए और अंग्रेजी हुकूमत की यातना सही। आजादी के बाद चिकित्सक के रूप में लोगों की सेहत सुधारने के लिए काम किया।
लोहाघाट ब्लॉक के इड़ाकोट गांव के डॉ. उप्रेती ने देश की आजादी के लिए लंबी जेल काटी। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भारत सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद रहे।
सेनानी के डॉ. बेटे सुरेश उप्रेती, पूरन उप्रेती, कैलाश उप्रेती बताते हैं कि सेनानी पिता ने अल्मोड़ा और बरेली जेल में कैद काटी। देश की स्वतंत्रता मिलने के बाद वे लोगों को स्वस्थ रखने के लिए चलाए अभियान से जुड़े रहे। बाद में डॉ. तारा दत्त उप्रेती ने आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के रूप में सेवा की।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिंतामणि जोशी। (फाइल फोटो)- फोटो : CHAMPAWAT

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