अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। नेपाल सीमा से लगे मडलक क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को संवारने की संभावनाओं पर पानी फिरता दिख रहा है। यहां के लिए प्रस्तावित एसएडी (राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी) के निर्माण की दिशा में सात माह बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ा जा सका है। जमीन नहीं मिलने से प्रस्ताव एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है, जबकि इस एलोपैथिक डिस्पेंसरी का पिछले साल अक्तूबर में मुख्यमंत्री ने एलान किया था।
नेपाल सीमा से लगे मडलक क्षेत्र की 11 हजार से अधिक आबादी के लिए इलाज की कोई सुविधा नहीं है। मडलक, बगोटी, लेटी, सुंगरखाल, जमरसौ, मंझपीपल, चामा, गुरैली, सुनकुरी, सेल्ला, कैलानी, सागर, बड़म, कनटुकरा आदि गांवों के लोगों को मामूली इलाज के लिए भी 25 किमी दूर लोहाघाट या 38 किमी दूर चंपावत जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। क्षेत्रीय लोगों की मांग पर 30 अक्तूबर 2019 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मडलक में राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी खोलने की घोषणा की थी। एलान के बाद इस साल फरवरी में सीएमओ की ओर से एसएडी खोले जाने का प्रस्ताव स्वास्थ्य महानिदेशालय भेजा गया था। जिसमें एक डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, वार्डब्वाय व स्वच्छक के पदों के सृजन का भी प्रस्ताव भेजा गया था। मगर निशुल्क जमीन का न मिल पाना इसके आड़े आ रहा है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि कार्यदाई संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग से अस्पताल के निर्माण के लिए भूमि की खोज कर आगणन बनाने को कहा गया है। --::: चंपावत जिले में इस वक्त हैं ये दस एसएडी ::: देवीधुरा, खेतीखान, रेगड़ू, इजड़ा, चौमेल, चल्थी, स्वांला, धौन, सिप्टी व टांण।