चंपावत। चंपावत नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को गर्मी में पेयजल किल्लत से निजात मिलने वाली है। निर्माणाधीन क्वैराला पेयजल योजना में टैंक, पाइप लाइन, पावर हाउस, ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा होने के बाद अब बिजली लाइन बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। ऊर्जा निगम के अभियंता आरसी पंत ने बताया कि कनेक्शन और लाइन बिछाने के लिए निगम को दो करोड़ रुपये मिल चुके हैं।
चंपावत क्षेत्र में 30 वर्ष तक पर्याप्त पेयजल देने के लिए 2015 में मंजूर 30.88 करोड़ रुपये की क्वैराला पेयजल योजना में सिविल कार्य से संबंधित अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है। पेयजल निगम के ईई वीके जोशी का कहना है कि मार्च 2021 तक योजना को पूरा कर लिया जाएगा। चंपावत में इस वक्त लोगों को बमुश्किल 40 प्रतिशत पानी मिल पा रहा है। चंपावत नगर क्षेत्र को रोजाना औसतन 17.50 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन महज साढ़े छह लाख लीटर मिल रहा है। इस योजना के पूरा होने से लोगों को भरपूर पानी मिल सकेगा।
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एसडीएम सड़क के डामरीकरण के लिए भेजी डीपीआर
चंपावत। लंबे संघर्ष के बाद सूखीढांग-डांडा-मीनार (एसडीएम) सड़क तो बन गई, लेकिन चार साल पूर्व कटिंग होने के बाद भी सड़क अभी कच्ची ही है। अलबत्ता मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस साल फरवरी में हुई घोषणा के बाद अब सड़क के डामरीकरण की कवायद शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग ने डामरीकरण की डीपीआर भेजी है।
56 किमी के इस मोटर मार्ग की कटिंग चार साल पूर्व 15 करोड़ रुपये से पूरी की गई। अब डामरीकरण के लिए बजट की मांग की गई है। लोनिवि के ईई एमसी पांडेय ने बताया कि डामरीकरण की डीपीआर भेजी गई है। सड़क के लिए 18 करोड़ रुपये मांग की गई है। डामरीकरण से वैकल्पिक मार्ग के अलावा सिख तीर्थ स्थली रीठा साहिब की 70 किमी की दूरी घटकर सिर्फ 80 किमी रह जाएगी। इस समय रीठा साहिब जाने के लिए टनकपुर से लोहाघाट होते हुए सफर तय करना पड़ता है। इसके अलावा 21 गांवों (सूखीढांग, गेरलेख, चौड़ाकोट, धूरा, पातल, मथियाबांज, तलियाबांज, बकोरिया, बुड़म, कल्लाड़, डांडा, कठौती, ककनई की धार, मल्ली टांण, तल्ली टांण, साल, मछियाड़, तलाड़ी, कुल्यालगांव, चौड़ामेहता, रीठा साहिब) की पांच हजार की आबादी की आवाजाही भी सुगम हो सकेगी।