चंपावत के चौकी गांव में मार्च 2016 में हुई राकेश मौनी हत्याकांड की मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई है। चार आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास और बलवा करने का कसूरवार पाया है। दो पर बलवा और हत्या के प्रयास आरोप साबित हो चुका है। महिला आरोपी पर बलवे का दोष साबित हुआ है। अदालत अब चार जून को अभियुक्तों को सजा सुनाएगी। अदालत के आदेश पर जमानत में चल रहे तीन आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
चंपावत के चौकी गांव में 22 मार्च 2016 को विवाद को लेकर राकेश मौनी (32) पुत्र कैप्टन (सेवानिवृत्त) बिंदु सिंह मौनी पर कुछ लोगों ने घर में घुसकर धारदार हथियार से हमला किया था। अस्पताल में इलाज के दौरान राकेश की मौत हो गई थी। राकेश के पिता ने ईश्वर सिंह, भगवत सिंह, पवन सिंह, लक्ष्मण सिंह, लक्ष्मण सिंह की पत्नी रेनु देवी, दिलीप सिंह, बोध सिंह के खिलाफ चंपावत कोतवाली में मामला दर्ज कराया था।
मंगलवार को जिला जज आशीष नैथानी ने सुनवाई पूरी की। जिला शासकीय अधिवक्ता सुनील खर्कवाल ने बताया कि कोर्ट ने ईश्वर सिंह, पवन सिंह, भगवत सिंह और दिलीप सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 302 और 307 , बोध सिंह और लक्ष्मण सिंह को 147, 148 और 307 और लक्ष्मण सिंह की पत्नी रेनु देवी को 147, 148 का दोषी पाया।
बदली गई थी हत्या के आरोप पत्र की धाराएं
चंपावत। राकेश मौनी हत्याकांड में पुलिस पर आरोपपत्र की धाराएं बदलने का आरोप लगा था। ये आरोप राकेश सिंह मौनी के पिता कैप्टन बिंदु सिंह मौनी (सेवानिवृत्त) ने अगस्त 2016 में विवेचना अधिकारी पर लगाया था। बिंदु सिंह मौनी का कहना था कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 18 जून 2016 को पेश मूल आरोप पत्र तथा अभियुक्तों की जमानत के समय उच्च न्यायालय में पेश आरोप पत्र में चार अभियुक्तों (बोध सिंह, दिलीप सिंह, लक्ष्मण सिंह और रेनू देवी) के खिलाफ दर्ज धाराएं बदल दी गई। इनके खिलाफ सिर्फ धारा 147 ही लिखी गई है। मूल चार्जशीट में सभी सातों अभियुक्तों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 302 और 307 लगाई गई थी। धारा बदलने से एक आरोपी रेनू देवी को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। बिंदु सिंह मौनी ने केस से संबंधित प्रपत्रों की कापी निकलवा कर इस मामले का खुलासा किया था। एसपी का कहना है कि जांच के बाद गड़बड़ी को दूर कर लिया गया था।