चंपावत। जिले में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण लागू लॉकडाउन के बीच स्वांला क्षेत्र की 20 महिलाओं का समूह अदरक की खेती में हाथ आजमा रहा है। इस दौरान सुरक्षित दूरी के नियमों का पालन करते हुए खेती का कार्य किया जा रहा है। सहकारिता विभाग के सहयोग से महिलाओं के समूह की ओर से 20 नाली भूमि में 60 क्विंटल अदरक लगाया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और गांवों से पलायन को रोकने के लिए सहकारिता विभाग की ओर से पहल शुरू की गई है। विभाग की ओर से अदरक की खेती के माध्यम से गांवों में महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। सहकारिता विभाग की कोट अमोड़ी साधन सहकारी समिति के माध्यम से स्वांला ग्राम पंचायत के दोली तोक में 20 नाली भूमि पर 60 क्विंटल अदरक का बीज लगाया जा रहा है।
स्वांला क्षेत्र में रोजगार के साधनों के अभाव में गांव के अधिकांश लोगों ने पलायन कर लिया है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के कारण अधिकतर प्रवासियों को घर लौटना पड़ा है। घर लौटे प्रवासी भी महिलाओं की सामूहिक खेती में हाथ बटाकर सहयोग कर रहे हैं। जिला उद्यान अधिकारी सतीश कुमार शर्मा के अनुसार जिले में 475 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अदरक की खेती से 3848 मीट्रिक टन की पैदावार होती है। कोट अमोड़ी साधन सहकारी समिति के सचिव तुलसी दत्त भट्ट, अध्यक्ष ईश्वरी दत्त भट्ट, गिरीश चंद्र, दीपक चंद्र आदि ने महिला समूह की सामूहिक खेती की पहल की सराहना की है।
12 सहकारी समितियों ने डेढ़ हजार नाली में लगाया था अदरक
चंपावत। कोरोना महामारी के काल में जिले की 12 साधन सहकारी समितियों के माध्यम से डेढ़ हजार नाली क्षेत्रफल में अदरक की खेती की गई थी। सहकारी समितियों के जिला सहायक निबंधक सुरेंद्र पाल के अनुसार राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के सहयोग से पिछले साल धूरा, अमोड़ी, चंपावत, टनकपुर, दिगालीचौड़, डुमडाई, चौमेल, चौड़ामेहता, इजड़ा, दुबचौड़ा, देवीधूरा और रौलमेल समितियों के माध्यम से अदरक की सामूहिक खेती के उत्साहजनक परिणाम रहे। अब स्वांला में महिला समूह के माध्यम से अदरक की खेती की जा रही है। (संवाद)