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झालाकुड़ी गांव की पेड़ से गिरी युवती की हल्द्वानी में मौत

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सुनीता को झालाकुड़ी से सड़क तक इस तरह कंधे में लाए थे ग्रामीण। (फाइल फोटो) - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। सड़क से फासला और सेहत की बदहाली ने एक और हंसती खेलती जिंदगी को निगल लिया। यहां से 47 किमी दूर चल्थी क्षेत्र के झालाकुड़ी गांव की एक युवती पेड़ से गिर कर चोटिल हो गई थी। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण देर से हल्द्वानी पहुंचाई गई इस युवती ने मंगलवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। बुधवार को गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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सुनीता आर्या (24) पुत्री रामी राम 26 दिसंबर को पेड़ से गिरकर चोटिल हो गई थी। परिजनों ने बताया कि सड़क नहीं होने से डोली में ले जाने के लिए लोगों को जुटाने में एक दिन लग गया। 27 दिसंबर को सुनीता को खटीमा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। परीक्षण के बाद रीढ़ की हड्डी टूटने की जानकारी मिली और हल्द्वानी रेफर किया गया। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचने के एक दिन बाद मंगलवार शाम को सुनीता ने दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था ने दूरदराज के लोगों का जीना दूभर कर रखा है। रोशन राम, गणेश, राजेश कुमार, मनोज, बिशन राम, होशियार, प्रकाश, मोहन राम, नंद्र कुमार आदि ने प्रशासन और विधायक से बुनियादी सुविधाओं की कमी को जल्द से जल्द दूर करने की मांग की है।
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फिर कटघरे में आई चंपावत की स्वास्थ्य सेवा
चंपावत। इस साल 26 मई को एक महिला ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के चल्थी में जन्मे नवजात की 108 एंबुलेंस में हल्द्वानी पहुंचने से पहले मौत, टनकपुर में सात अगस्त को अस्पताल पहुंचने से पहले नगर क्षेत्र के एक जच्चा-बच्चा की मौत और 12 अक्तूबर को लधौन-कमलेख में एक महिला का खेत में नवजात का जन्म देना और अब झालाकुड़ी गांव की सुनीता की मौत। ये तमाम वाकये चंपावत जिले की स्वास्थ्य सेवा को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। झालाकुड़ी से बमुश्किल 13 किमी दूर चल्थी में राजकीय एलोपैथिक डिस्पेंसरी है। लेकिन इन दिनों यह अस्पताल डॉक्टर विहीन है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि यहां के दोनों डॉक्टर इन दिनों कोरोना ड्यूटी में टनकपुर-बनबसा में तैनात किए गए हैं।
टनकपुर संयुक्त अस्पताल के हाल भी बेहद खराब हैं। इसी के चलते सुनीता को परिजन उसे टनकपुर के बजाय सीधे खटीमा निजी अस्पताल ले गए। टनकपुर का ट्रॉमा सेंटर पूरा होने के बाद भी शुरू नहीं हो सका है। जबकि अस्पताल में फिजीशियन से लेकर ज्यादातर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं। निश्चेतक और सर्जन जरूर हैं, लेकिन उपकरण न होने से लंबे समय से ऑपरेशन भी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में चंपावत-टनकपुर के गांवों के लोग इस अस्पताल पर कम ही भरोसा करते हैं।
वैसे वक्त पर इलाज नहीं मिलने से इस साल 23 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं जिले में डॉक्टरों की भारी कमी है। 107 के सापेक्ष महज 59 डॉक्टर इस समय सेवा दे रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि व्यवस्था को सुधारने के लिए डॉक्टरों की तैनाती के लिए निदेशालय से आग्रह किया गया है।
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