चंपावत। जिले की दूरस्थ ग्राम पंचायत कोट अमोड़ी में दो हजार से अधिक की आबादी का 78 साल बाद भी आठ किलोमीटर लंबी सड़क का इंतजार खत्म नहीं हो सका है। ग्राम पंचायत में कोट अमोड़ी, लेक अमोड़ी, संदर्का और जौरका गांव शामिल हैं। यहां के लोगों को पक्की सड़क तक पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर की थकान भरी पगडंडी पर चलना पड़ता है। हालांकि लोनिवि की ओर से सड़क निर्माण की पूरी प्रक्रिया होने के बाद अब इसकी जिम्मेदारी पीएमजीएसवाई विभाग को मिल गई है।
कोट अमोड़ी ग्राम पंचायत के ग्रामीणों के लिए सड़क आज भी सपने से कम नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व गांव तक विधायक निधि से सड़क कटिंग तो की गई लेकिन उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। सड़क नहीं होने से ग्राम पंचायत से लगातार पलायन हो रहा है। स्थिति यह है कि दो दशक पूर्व ग्राम पंचायत में 450 से अधिक परिवार निवास करते थे, अब करीब 100 परिवार ही बचे हैं। सुविधाओं के अभाव में ये परिवार भी धीरे-धीरे पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वे लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। अब उनका धैर्य भी जवाब देने लगा है।
लोनिवि ने लगा दिए थे पिलर
चौड़खोला से जौरका जाने वाली आठ किमी लंबी सड़क की नई सिरे से प्रक्रिया की जाएगी। पहले यह सड़क लोनिवि के पास थी। इसमें सर्वे कार्य होने के साथ पिलर भी लगा दिए गए थे। सिर्फ सिविल वन भूमि की स्वीकृति मिलनी शेष थी। अब प्रक्रिया फिर से नए सिरे से पीएमजीसवाई की ओर से की जाएगी।
बीमार के लिए डोली बनती है एंबुलेंस
टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच से पांच किमी खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद ग्राम पंचायत तक पहुंचा जाता है। ग्रामीण और बीमारों के लिए आज भी डोली ही 108 एंबुलेंस का काम करती है। ग्रामीण रस्सी-डंडों के सहारे बीमार व्यक्ति को डोली में बैठाकर मुख्य मार्ग तक लाते हैं। रोजाना ग्रामीण पांच किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के लिए मजबूर हैं। कई बार मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है।
कोट
चौड़खोला से जौरका तक जाने वाली सड़क की शासन से भी सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। अब सर्वे कार्य किया जाएगा। कार्य पूरा होने के बाद डीपीआर तैयार कर सड़क निर्माण की कार्यवाही की जाएगी। - चंदन भारद्वाज, सहायक अभियंता, पीएमजीएसवाई