लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट के काकड़, मूलाकोट और नेपाल सीमा के रौंसाल कस्बे में रामलीला की धूम मची हुई है। काकड़ में कुंभकर्ण, मेघनाद, अहिरावण, रावण वध की रामलीला का मंचन किया गया। लक्ष्मण द्वारा मेघनाद को मारे जाने के बाद उनकी पत्नी सुलोचना कहती हैं पति की भुजा देख फटी मेरी छाती, मेरे पति को वह नर मारे जन्मजाती जो होय। रावण के मरणासन्न होने पर श्रीराम लक्ष्मण को रावण से ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेजते हैं। रावण कहता है सत धर्म को न छोड़ो ऐ पाप करने वालो, गौ दीन बंधु सबको सताया मैने, फल उसका पा रहा हूं।
रौंसाल में चल रही रामलीला में मेघनाद द्वारा शक्ति बाण से लक्ष्मण को मूर्छित किया गया। श्रीराम काफी व्याकुल हो गए। हनुमान जी लंका से सुषैण वैद्य को लाए, वैद्य के कहने पर वह रातोंरात सुमेरू पर्वत से संजीवनी बूटी लाए और लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई। नरेश पंत द्वारा हवाई मार्ग से हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने का शानदार प्रदर्शन किया गया। मूलाकोट की रामलीला में श्रीराम द्वारा मृग का वध करने जंगल जाना, रावण का साधु वेश में सीता से भिक्षा मांगने के बहाने हरण करने की रामलीला का मंचन हुआ।