बनबसा (चंपावत)। नई नगर पंचायत बनबसा को संसाधन से लेकर कर्मियों तक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अधिशासी अधिकारी (ईओ) के अलावा एकमात्र कर्मी पर पंचायत की समूची जिम्मेदारी है।
चंपावत जिले की चार नगर निकायों में से बनबसा सबसे नई है। उत्तराखंड बनने के बाद अस्तित्व में आने वाले यह जिले की अकेली नगर पंचायत है। चार साल पहले स्थापित इस पंचायत का जिम्मा 2017 तक टनकपुर के ईओ के पास था। इस साल के शुरू में नौनी राम को प्रभारी ईओ बनाकर खटीमा से भेजा गया।
काफी वक्त तक उन्होंने पंचायत का कामकाज अकेले ही निपटाया। अब कुछ समय पूर्व एक बाबू को यहां संबद्ध किया गया है। कर्मियों की कमी से यहां करों की वसूली से लेकर साफ-सफाई तक प्रभावित हो रही है। प्रभारी ईओ नौनी राम का कहना है कि यहां केंद्रीय संवर्ग के चार कर्मी हैं, लेकिन इनमें से सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक और डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद खाली है। बैठक में जाने या फील्ड के काम की वजह से रूटीन काम पर असर पड़ रहा है।
टैक्स फ्री पंचायत है बनबसा
बनबसा नगर पंचायत को बने चार साल होने को हैं, लेकिन पंचायत ने अभी तक एक ढेले की आय नहीं की है। भवन कर, तहबाजारी अथवा दूसरे मदों से उसे अभी तक एक भी रुपया नहीं मिला है। प्रभारी ईओ नौनी राम का कहना है कि नगर पंचायत ने इन करों से संबंधित उप नियम तो बना लिए हैं, मगर इन्हें अभी लागू नहीं किया जा सका है। अब कर वसूली का काम नए बोर्ड के गठन के बाद ही शुरू हो सकेगा। अलबत्ता राज्य वित्त से दो किस्त में उसे 1.25 करोड़ रुपये जरूर मिले हैं।
नगर पंचायत में कर्मियों की कमी से जरूरी कामकाज निपटाना मुश्किल हो रहा है। कर संग्रहण कर्ता से लेकर निरीक्षक तक के नहीं होने से कर वसूली भी नहीं हो पा रही है। पदों को भरने के लिए कई बार निदेशालय को खत भेजा गया है।
नौनी राम, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, बनबसा।
कर्मचारी दो, मगर वार्ड सात
बनबसा नगर पंचायत में चार साल बाद भी कर्मचारियों की तैनाती नहीं हो सकी है। भले ही यहां ईओ के अलावा एक संबद्ध कर्मचारी है, लेकिन नगर पंचायत के वार्ड सात हैं। और 18 नवंबर को अध्यक्ष तथा सात सभासद निर्वाचित हो जाएंगे।